🗂️ श्रेणी: राजनीति | पंजाब पॉलिटिक्स | BJP | 2027 विधानसभा चुनाव
🏛️ गठबंधन पर विराम, आत्मनिर्भर BJP का दावा
पंजाब की राजनीति में गठबंधन को लेकर चल रही अटकलों पर केंद्रीय राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने बड़ा और साफ बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बीजेपी को शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ गठबंधन की कोई जरूरत नहीं है और पार्टी अपने दम पर पंजाब में सत्ता हासिल कर सकती है।
बिट्टू ने यह बयान कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान दिया, जब उनसे अकाली दल के साथ संभावित गठबंधन को लेकर सवाल पूछा गया था।
⚠️ अकाली शासन पर सीधा हमला
बिट्टू ने अकाली दल पर तीखा हमला करते हुए कहा कि:
- SAD के शासनकाल में ड्रग्स और गैंगस्टरवाद चरम पर था
- अकाली दल कई गुटों में बंटा हुआ है
- गठबंधन का मतलब पुराने हालात की वापसी हो सकता है
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या बीजेपी ऐसे मुद्दों के लिए गठबंधन करेगी, जिनसे पंजाब पहले ही नुकसान झेल चुका है।
🔄 AAP की प्रतिक्रिया: गंभीर आरोप
बिट्टू के बयान पर आम आदमी पार्टी (AAP) ने पलटवार किया।
AAP नेता बलतेज पन्नू ने कहा कि बिट्टू ने खुद यह स्वीकार किया है कि अकाली दल के साथ जाना मतलब ड्रग्स और गैंगस्टर कल्चर की वापसी होगा।
पन्नू ने सवाल किया कि अगर अकाली दल इन समस्याओं के लिए जिम्मेदार था, तो बीजेपी के कुछ नेता उनके साथ गठबंधन की वकालत क्यों कर रहे हैं?
🚨 मान सरकार के खिलाफ BJP का प्रदर्शन
इसी बीच, पंजाब में बीजेपी ने आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
- मुख्यमंत्री भगवंत मान के आवास का घेराव करने की कोशिश
- पुलिस ने बीजेपी नेताओं को रोका
- प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़, मनोरंजन कालिया समेत कई नेता हिरासत में
सुनील जाखड़ ने आरोप लगाया कि पंजाब में आम लोग सुरक्षित नहीं हैं और राज्य में “गैंगस्टर राज” कायम हो चुका है।
🗳️ 2027 की तैयारी, सभी 117 सीटों पर नजर
इससे पहले अक्टूबर 2025 में रवनीत बिट्टू ने साफ कर दिया था कि:
- बीजेपी पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी
- किसी भी पार्टी पर निर्भर नहीं रहेगी
गौरतलब है कि शिरोमणि अकाली दल ने 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर NDA से नाता तोड़ लिया था। हालांकि 2027 चुनाव से पहले दोनों दलों के फिर साथ आने की अटकलें थीं, लेकिन बिट्टू के बयान ने इन कयासों को काफी हद तक विराम दे दिया है।
📌 निष्कर्ष
रवनीत सिंह बिट्टू का बयान साफ संकेत देता है कि बीजेपी पंजाब में नई रणनीति के साथ, बिना किसी पुराने सहयोगी के, अकेले मैदान में उतरने को तैयार है। इससे न सिर्फ SAD से दूरी स्पष्ट होती है, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब की राजनीति में नई ध्रुवीकरण की तस्वीर भी उभरती नजर आ रही है।
