ईरान में अभूतपूर्व उथल-पुथल: 31 प्रांतों में विरोध प्रदर्शन, इंटरनेट और एयरस्पेस सील

🌍 अंतरराष्ट्रीय डेस्क | तेहरान

ईरान इस वक्त अपने सबसे गंभीर आंतरिक संकटों में से एक से गुजर रहा है। देश के सभी 31 प्रांतों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जिससे सरकार की चिंताएं बढ़ गई हैं। हालात काबू में रखने के लिए प्रशासन ने इंटरनेट सेवाएं और अंतरराष्ट्रीय संचार अस्थायी रूप से बंद कर दिए हैं।


🔥 सड़कों पर गुस्सा, सत्ता के खिलाफ नारे

देशभर में प्रदर्शनकारियों ने

  • मौजूदा शासन के खिलाफ नारे लगाए
  • कई स्थानों पर सरकारी और धार्मिक इमारतों को नुकसान पहुंचने की खबरें आईं

इन आंदोलनों को निर्वासन में रह रहे ईरान के क्राउन प्रिंस रजा पहलवी के संदेशों से नई ऊर्जा मिली है, जिससे सरकार पर दबाव और बढ़ गया है।


🏛️ सरकार की सफाई और आर्थिक कदम

ईरान के राष्ट्रपति ने माना है कि

  • जनता की नाराजगी के लिए नीतिगत कमियां भी जिम्मेदार हैं

स्थिति संभालने के लिए सरकार ने

  • सब्सिडी में बढ़ोतरी
  • व्यापारियों को कीमतें न बढ़ाने और जमाखोरी से बचने की सख्त चेतावनी

जैसे कदम उठाए हैं, लेकिन फिलहाल इसका विरोध प्रदर्शनों पर खास असर नहीं दिख रहा।


📵 इंटरनेट बंद, बाहरी संपर्क पर रोक

प्रदर्शनों को फैलने से रोकने के उद्देश्य से

  • इंटरनेट सेवाएं ठप
  • ईरान को अंतरराष्ट्रीय टेलीफोन नेटवर्क से भी अलग कर दिया गया

इन कदमों को हालिया आंदोलन की पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।


⚖️ हिंसा और गिरफ्तारियां

मानवाधिकार संगठनों के अनुसार

  • अब तक दर्जनों लोगों की मौत
  • हजारों प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए जा चुके हैं

हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।


🌐 अंतरराष्ट्रीय राजनीति की एंट्री

ईरान सरकार का आरोप है कि

  • इन आंदोलनों के पीछे विदेशी ताकतों की भूमिका हो सकती है

वहीं,

  • अमेरिका और इजरायल के नेताओं ने प्रदर्शनकारियों के समर्थन में बयान दिए हैं
  • अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी शासन को सख्त चेतावनी भी दी है

इसके जवाब में ईरानी सेना ने साफ कहा है कि

किसी भी बाहरी हस्तक्षेप का कड़ा सैन्य जवाब दिया जाएगा।


🛡️ सेना का सख्त संदेश

ईरानी सेना प्रमुख ने कहा कि

  • देश की सशस्त्र सेनाएं पूरी तरह तैयार हैं
  • किसी भी आक्रामक कदम का पहले से ज्यादा कड़ा जवाब दिया जाएगा

📌 निष्कर्ष

ईरान में जारी यह आंदोलन अब केवल आंतरिक असंतोष नहीं रह गया है, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीति से जुड़ा गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है। आने वाले दिन तय करेंगे कि यह संकट किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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