ऑपरेशन सिंदूर से घबराया पाकिस्तान, अमेरिका में तेज़ लॉबिंग से तलाशा बचाव का रास्ता: रिपोर्ट

🌍 अंतरराष्ट्रीय मामले (International Affairs)

अमेरिकी सरकारी दस्तावेज़ों में सामने आया है कि मई 2025 में भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने वॉशिंगटन में बड़े स्तर पर राजनयिक और लॉबिंग गतिविधियां तेज कर दी थीं। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान का उद्देश्य अमेरिका के जरिए भारत की सैन्य कार्रवाई पर दबाव बनवाना था।

🏛️ कूटनीति और लॉबिंग (Diplomacy & Lobbying)

दस्तावेज़ बताते हैं कि पाकिस्तान के राजदूत और डिफेंस अटैची ने अमेरिकी सत्ता तंत्र में सक्रिय संपर्क साधा।

  • कांग्रेस, पेंटागन, स्टेट डिपार्टमेंट और मीडिया संस्थानों से 50 से अधिक बैठकों का अनुरोध
  • ई-मेल, फोन कॉल और व्यक्तिगत मुलाकातों के जरिए प्रयास
  • अप्रैल–मई 2025 के दौरान लॉबिंग सबसे अधिक तेज रही

💰 खर्च और रणनीति (Funding & Strategy)

रिपोर्ट के अनुसार:

  • पाकिस्तान ने भारत की तुलना में कई गुना अधिक लॉबिंग खर्च किया
  • वॉशिंगटन की 6 लॉबिंग फर्मों के साथ लगभग 5 मिलियन डॉलर (करीब 41 करोड़ रुपये) का वार्षिक समझौता
  • लॉबिंग का फोकस कश्मीर, क्षेत्रीय सुरक्षा, खनिज संसाधन और द्विपक्षीय संबंधों पर रहा

🇺🇸 अमेरिका-पाक संबंध (US–Pakistan Relations)

इन प्रयासों के चलते पाकिस्तान को अमेरिकी प्रशासन तक सीधी पहुंच मिली। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि इस दौरान उच्च स्तरीय मुलाकातें संभव हुईं और दोनों देशों के रिश्तों में अस्थायी नरमी देखी गई।
बाद के महीनों में पाकिस्तान ने अमेरिका के साथ रिश्तों को बेहतर दिखाने की कोशिशें और तेज कीं, हालांकि साल के अंत तक लॉबिंग खर्च घटता नजर आया।

⚔️ ऑपरेशन सिंदूर: पृष्ठभूमि (Operation Sindoor Background)

  • अप्रैल 2025: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत
  • मई 2025: भारत ने जवाबी कार्रवाई में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया
  • पाकिस्तान और PoK में आतंकी ढांचे पर सटीक सैन्य हमले
  • भारत ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई केवल आतंकी ठिकानों तक सीमित थी

🕊️ नतीजा और आगे की स्थिति (Outcome & Developments)

ऑपरेशन के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ा, लेकिन बाद में सीजफायर लागू हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम ने दक्षिण एशिया की कूटनीति में अमेरिका की भूमिका को एक बार फिर चर्चा में ला दिया।

📝 निष्कर्ष (Conclusion)

अमेरिकी दस्तावेज़ यह संकेत देते हैं कि भारत की सैन्य कार्रवाई के दौरान पाकिस्तान ने कूटनीतिक दबाव और लॉबिंग को अहम हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया। यह मामला बताता है कि आधुनिक संघर्ष सिर्फ सीमाओं पर नहीं, बल्कि वैश्विक राजधानियों में भी लड़े जाते हैं।

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