गाजा में जारी संघर्ष को खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेज़ कोशिशें शुरू हो गई हैं। इसी कड़ी में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नई शांति पहल के तहत भारत को भी अहम भूमिका निभाने का आमंत्रण दिया है। सूत्रों के मुताबिक, भारत को गाजा के लिए गठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का निमंत्रण मिला है।
🇮🇳 भारत को क्यों माना जा रहा है अहम भागीदार
भारत के इज़रायल और फिलिस्तीन दोनों देशों के साथ लंबे समय से कूटनीतिक संबंध रहे हैं। संघर्ष शुरू होने के बाद भारत ने मिस्र के रास्ते गाजा को मानवीय सहायता भी भेजी है। यही कारण है कि भारत को एक संतुलित और भरोसेमंद पक्ष के रूप में देखा जा रहा है।
🕊️ भारत का रुख: शांति और आतंकवाद के खिलाफ सख्त संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले भी गाजा संकट के शांतिपूर्ण समाधान की वकालत कर चुके हैं। उन्होंने बंधकों की रिहाई को लेकर हुए समझौते का स्वागत किया था और स्पष्ट किया था कि आतंकवाद किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। भारत लगातार बातचीत और कूटनीति के जरिए समाधान पर जोर देता रहा है।
🇵🇰 पाकिस्तान को भी मिला आमंत्रण
पाकिस्तान ने भी दावा किया है कि उसे गाजा के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का न्योता मिला है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को इस पहल का औपचारिक निमंत्रण मिला है और देश संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के तहत समाधान का समर्थन करेगा।
🏛️ क्या है गाजा का ‘बोर्ड ऑफ पीस’
- यह बोर्ड डोनाल्ड ट्रंप की 20-सूत्रीय गाजा शांति योजना का हिस्सा है
- गठन की तारीख: 15 जनवरी
- उद्देश्य: गाजा में गवर्नेंस सिस्टम का पुनर्निर्माण और स्थिरता स्थापित करना
👥 बोर्ड में कौन-कौन होंगे शामिल
- डोनाल्ड ट्रंप – चेयरपर्सन
- अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो
- पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर
- जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ (वरिष्ठ वार्ताकार)
इस बोर्ड को एक नए अंतरराष्ट्रीय ढांचे और ट्रांजिशनल गवर्निंग बॉडी के रूप में देखा जा रहा है।
🌐 अंतरराष्ट्रीय मंजूरी और आगे की राह
व्हाइट हाउस के अनुसार, इस योजना को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की भी मंजूरी मिल चुकी है। ट्रंप का कहना है कि यह बोर्ड गाजा में स्थायी शांति की दिशा में अब तक की सबसे प्रभावशाली पहल साबित हो सकता है।
🔍 निष्कर्ष
यदि भारत इस बोर्ड का हिस्सा बनता है, तो यह पश्चिम एशिया में उसकी कूटनीतिक भूमिका को और मजबूत करेगा। गाजा संकट के समाधान में भारत की भागीदारी वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती साख का संकेत मानी जा रही है।
