ट्रंप के बयानों से NATO पर संकट? ग्रीनलैंड को लेकर डेनमार्क की चेतावनी ने बढ़ाई यूरोप की चिंता

🗞️ अंतरराष्ट्रीय डेस्क (International Affairs)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयानों ने एक बार फिर वैश्विक राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। वेनेजुएला में हुए सैन्य ऑपरेशन के बाद ट्रंप अब खनिज संसाधनों से समृद्ध ग्रीनलैंड को लेकर आक्रामक रुख अपनाते नजर आ रहे हैं। उनके बयान न सिर्फ यूरोप में चिंता बढ़ा रहे हैं, बल्कि NATO जैसे 75 साल पुराने सैन्य गठबंधन के भविष्य पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं।

🇩🇰 डेनमार्क का सख्त रुख (Europe Desk)

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन ने ट्रंप के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा कि अगर अमेरिका किसी NATO सहयोगी देश या उसके क्षेत्र पर सैन्य दबाव बनाता है, तो यह गठबंधन के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा होगा।
फ्रेडरिकसेन ने यह भी दोहराया कि ग्रीनलैंड की स्थिति वेनेजुएला जैसी नहीं है और किसी भी तरह की जबरदस्ती स्वीकार्य नहीं होगी।

🧭 ग्रीनलैंड क्यों बना रणनीतिक केंद्र? (Geopolitics Desk)

ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है, रणनीतिक और आर्थिक दोनों लिहाज से बेहद अहम माना जाता है।

  • यहां दुर्लभ खनिज संसाधनों की भरमार है
  • अमेरिका का एक अहम स्पेस और मिसाइल डिफेंस बेस पहले से मौजूद है
  • आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती गतिविधियों को लेकर पश्चिमी देशों में चिंता है

इन्हीं कारणों से ट्रंप इसे अमेरिका की “राष्ट्रीय सुरक्षा” से जोड़कर देख रहे हैं।

📱 सोशल मीडिया से बढ़ा विवाद (Media & Diplomacy)

तनाव तब और बढ़ गया जब ट्रंप से जुड़े एक करीबी के परिवार सदस्य ने सोशल मीडिया पर ग्रीनलैंड का ऐसा नक्शा साझा किया, जिसे अमेरिकी झंडे के रंगों में दिखाया गया था। इस पोस्ट को डेनमार्क ने अपनी क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ बताया और कड़ा विरोध दर्ज कराया।

⚠️ NATO के लिए क्यों है यह मामला संवेदनशील? (Defense & Security Desk)

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और डेनमार्क जैसे NATO सहयोगी आमने-सामने आते हैं, तो यह गठबंधन के मूल सिद्धांतों को कमजोर कर सकता है। NATO की नींव आपसी विश्वास और सामूहिक सुरक्षा पर टिकी है, और किसी सदस्य पर दबाव या सैन्य धमकी इस ढांचे को हिला सकती है।

📝 निष्कर्ष (Conclusion)

डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने यह साफ कर दिया है कि ग्रीनलैंड सिर्फ एक द्वीप नहीं, बल्कि आने वाले समय में वैश्विक शक्ति संतुलन का बड़ा केंद्र बन सकता है। डेनमार्क की चेतावनी और यूरोप की बढ़ती चिंता इस बात का संकेत है कि अगर कूटनीति ने काम नहीं किया, तो NATO के भीतर गंभीर मतभेद उभर सकते हैं।

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