मुंबई महानगरपालिका (BMC) के महापौर पद को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान के बीच शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत के एक बयान ने सियासी हलचल और तेज कर दी है। उन्होंने सत्तारूढ़ दल पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं भाजपा ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है।
📞 संजय राउत का दावा: पार्षदों की गतिविधियों पर निगरानी
संजय राउत का कहना है कि मुंबई मेयर पद को लेकर जारी रस्साकशी के दौरान भाजपा और शिंदे गुट के नवनिर्वाचित पार्षदों की गतिविधियों पर करीबी नजर रखी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि पार्षदों के फोन तक मॉनिटर किए जा रहे हैं और फैसले महाराष्ट्र से बाहर तय किए जा रहे हैं, जिसे उन्होंने राज्य के स्वाभिमान से जोड़कर देखा।
🗳️ बीएमसी चुनाव परिणाम: महायुति को स्पष्ट बढ़त
हालिया बीएमसी चुनावों में भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के गठबंधन ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है। भाजपा को 89 सीटें जबकि शिंदे गुट को 29 सीटें मिली हैं। इस जीत के साथ ही करीब तीन दशक से चला आ रहा ठाकरे परिवार का प्रभाव नगर निकाय से खत्म हो गया।
🏨 पार्षदों को होटल में ठहराने पर भी उठे सवाल
चुनाव के बाद शिंदे गुट ने अपने सभी नवनिर्वाचित पार्षदों को मुंबई के एक होटल में ठहराया। इसे आधिकारिक तौर पर नगर निगम के कामकाज से जुड़ी कार्यशाला बताया गया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस कदम को रणनीतिक एहतियात के तौर पर देखा जा रहा है।
🤝 राज ठाकरे से मुलाकात, बढ़ी राजनीतिक चर्चाएं
मेयर पद की अनिश्चितता के बीच संजय राउत ने महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे से मुलाकात की। इस बैठक ने संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाओं को और हवा दे दी है।
🗣️ भाजपा का पलटवार: आरोप निराधार
भाजपा की ओर से संजय राउत के दावों को पूरी तरह खारिज किया गया है। पार्टी के मीडिया प्रभारी ने कहा कि भाजपा को अपने पार्षदों पर पूरा भरोसा है और किसी तरह की निगरानी या फोन टैपिंग जैसी गतिविधियों में पार्टी शामिल नहीं है। साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान किसके फोन मॉनिटर किए जा रहे थे।
🔎 निष्कर्ष
मुंबई मेयर की कुर्सी को लेकर राजनीतिक बयानबाजी अपने चरम पर है। जहां एक ओर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, वहीं अंतिम फैसला राजनीतिक सहमति और रणनीति पर ही निर्भर करेगा। फिलहाल यह मामला सियासी बयानबाज़ी और दावों तक ही सीमित है।
