संगीत की विरासत से वायरल हिट तक: ‘बॉर्डर 2’ के गाने ने क्यों बना दिया मिथुन को चर्चा का केंद्र

✍️ एंटरटेनमेंट डेस्क | बॉलीवुड म्यूज़िक स्पेशल


🌟 क्लासिक गाने की नई आत्मा

फिल्म बॉर्डर 2 में शामिल किया गया गीत ‘संदेसे आते हैं’ एक बार फिर श्रोताओं के दिलों को छू रहा है। इस आइकॉनिक ट्रैक को नए अंदाज़ में पेश किया है म्यूजिक कंपोजर मिथुन ने।
रीक्रिएशन के बाद से यह गाना सोशल मीडिया और म्यूजिक प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से ट्रेंड कर रहा है और श्रोताओं को पुरानी यादों से जोड़ रहा है।


🎼 संगीत की विरासत से जुड़ा नाम

मिथुन का ताल्लुक भारतीय फिल्म संगीत की एक मजबूत विरासत से है। वह दिग्गज संगीतकार प्यारेलाल शर्मा के परिवार से आते हैं, जिन्होंने लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल की ऐतिहासिक जोड़ी के रूप में संगीत को नई ऊंचाइयां दी थीं।
यही वजह है कि मिथुन के कंपोजिशन में क्लासिक फील और मॉडर्न टच का संतुलन साफ नजर आता है।


🚀 आशिकी 2 से बदली किस्मत

मिथुन ने अपने करियर की शुरुआत 2005 में की थी, लेकिन असली पहचान मिली:

  • ‘आशिकी 2’ के सुपरहिट एल्बम से
  • इसके बाद जिस्म 2, हमारी अधूरी कहानी जैसी फिल्मों ने उन्हें म्यूजिक इंडस्ट्री का मजबूत नाम बना दिया

इन गानों ने न सिर्फ चार्ट्स पर राज किया, बल्कि मिथुन को लगातार हिट देने वाले कंपोजर की लिस्ट में शामिल कर दिया।


❤️ भावनाओं से जुड़ा संगीत

2015 में आई हमारी अधूरी कहानी में मिथुन का संगीत भावनात्मक गहराई का बेहतरीन उदाहरण माना गया।
यही उनकी सबसे बड़ी ताकत रही है—ऐसा संगीत जो सिर्फ सुना नहीं जाता, बल्कि महसूस किया जाता है।


🎥 ‘बॉर्डर 2’ से फिर चर्चा में

‘संदेसे आते हैं’ जैसे संवेदनशील और देशभक्ति से जुड़े गीत को नए रूप में पेश करना आसान नहीं था, लेकिन मिथुन के ट्रीटमेंट ने:

  • पुरानी भावनाओं को बरकरार रखा
  • नई पीढ़ी से भी कनेक्ट बनाया

यही वजह है कि यह गाना रिलीज होते ही वायरल हो गया।


👨‍👩‍👧 म्यूजिक फैमिली से मजबूत रिश्ता

मिथुन निजी जिंदगी में भी संगीत से जुड़े हुए हैं। उन्होंने लोकप्रिय सिंगर पलक मुच्छल से शादी की है।
पलक के भाई पलाश मुच्छल भी इंडस्ट्री का जाना-माना नाम हैं। इस तरह मिथुन का नाम सिर्फ उनके काम से ही नहीं, बल्कि म्यूजिक फैमिली के मजबूत नेटवर्क से भी जुड़ा है।


🔚 निष्कर्ष

बॉर्डर 2 का यह गाना साबित करता है कि मिथुन सिर्फ एक कंपोजर नहीं, बल्कि ऐसे कलाकार हैं जो क्लासिक धुनों को नए दौर में भी उतनी ही मजबूती से पेश कर सकते हैं।
संगीत की विरासत, भावनात्मक समझ और आधुनिक प्रस्तुति—यही उनकी पहचान बन चुकी है।

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