EU–US ट्रेड डील से भारत को ‘Reforms 2.0’ की रफ्तार**
नई दिल्ली, 8 फरवरी 2026
साल 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद भारत की अर्थव्यवस्था ने जो दिशा बदली थी, अब वैसा ही एक और बड़ा मोड़ सामने आ रहा है। भारत–अमेरिका और भारत–यूरोपीय संघ के बीच ट्रेड डील को कई अर्थशास्त्री 1991 के सुधारों से भी बड़ा कदम बता रहे हैं। इन समझौतों से भारत को वैश्विक व्यापार में नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
भारत–अमेरिका ट्रेड डील: क्या बदला?
भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम व्यापार समझौते (Trade Deal Framework) के तहत अमेरिका ने बड़ा फैसला लिया है—
- अमेरिका ने भारत से आने वाले उत्पादों पर लगाया गया
25% अतिरिक्त पेनल्टी टैरिफ खत्म कर दिया - अब सिर्फ 18% का सामान्य टैरिफ लागू होगा
- नई टैरिफ व्यवस्था 7 फरवरी 2026 से प्रभावी हो गई है
व्हाइट हाउस की ओर से जारी कार्यकारी आदेश के मुताबिक यह फैसला हालिया टैरिफ तनाव और लंबी बातचीत के बाद लिया गया है।
🌾 किसानों के हित सुरक्षित
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने साफ किया कि—
- भारत ने कृषि और डेयरी सेक्टर में अमेरिका को कोई रियायत नहीं दी
- जिन उत्पादों पर 0% टैरिफ नहीं दिया गया, उनमें शामिल हैं:
- मीट, पोल्ट्री, डेयरी
- गेहूं, चावल, मक्का, सोयाबीन
- चीनी, ज्वार, बाजरा, रागी
- एथेनॉल, तंबाकू
उन्होंने कहा कि यह फैसला भारतीय किसानों के हितों की पूरी तरह रक्षा करता है।
📉 भारत को क्यों मिलेगा फायदा?
16वें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया के मुताबिक—
- अमेरिका में भारत पर टैरिफ: 18%
- भारत के प्रमुख प्रतिस्पर्धी देशों पर टैरिफ:
- चीन: 35%
- वियतनाम: 20%
- इंडोनेशिया: 19%
इससे भारत को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी और निर्यात को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
🚀 2047 के लक्ष्य की ओर बड़ा कदम
पीयूष गोयल ने इसे भारत की ‘विकसित भारत 2047’ यात्रा का ऐतिहासिक दिन बताया।
- फरवरी 2025 में शुरू हुई बातचीत
- लक्ष्य: भारत–अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचाना
- अमेरिका (करीब 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था)
अब भारतीय निर्यातकों के लिए सबसे अहम बाजार बनने की ओर
🔑 निष्कर्ष
यह ट्रेड डील सिर्फ टैरिफ में कटौती नहीं है, बल्कि भारत के लिए
Reforms 2.0, ग्लोबल इंटीग्रेशन और मैन्युफैक्चरिंग–एक्सपोर्ट बूम की नींव है।
इसीलिए इसे 1991 के बाद सबसे बड़ा आर्थिक टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है।
