🏛️ राजनीति डेस्क (Politics Desk)
दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ लगाए गए विवादित नारों को लेकर देशभर में राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है। इस मुद्दे पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कड़ा बयान देते हुए कहा कि देशविरोधी सोच को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
🚨 JNU प्रशासन का रुख (Campus Administration)
JNU प्रशासन ने इस नारेबाजी को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए इसे गंभीर मामला करार दिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत पर इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई है। प्रशासन का कहना है कि कैंपस किसी भी प्रकार की राष्ट्रविरोधी गतिविधियों का केंद्र नहीं बन सकता।
⚖️ पूरा विवाद कैसे शुरू हुआ? (Background Desk)
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में आरोपी शरजील इमाम और उमर खालिद को जमानत देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद JNU परिसर में कुछ छात्र संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया, जिसमें कथित तौर पर शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए गए। इसी घटना ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया।
🗣️ CM फडणवीस का बयान (Statement Desk)
इस मामले पर नागपुर में प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि देश को तोड़ने वाली सोच और राष्ट्रविरोधी विचारधाराओं के खिलाफ सरकार सख्ती से कार्रवाई करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे इरादों को किसी भी स्तर पर आगे बढ़ने नहीं दिया जाएगा और कानून के तहत आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
🏹 छत्रपति शिवाजी महाराज पर टिप्पणी (Cultural Desk)
एक अलग सवाल पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने छत्रपति शिवाजी महाराज को लेकर हुई कथित जातिगत टिप्पणी पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज किसी एक समाज या वर्ग के नहीं थे, बल्कि पूरे देश के प्रेरणास्रोत थे। महापुरुषों को जाति या समुदाय में बांटना उचित नहीं है।
🔍 राजनीतिक माहौल (Political Impact)
इस पूरे घटनाक्रम के बाद सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। एक ओर जहां सरकार सख्त कार्रवाई की बात कर रही है, वहीं विपक्ष अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठा रहा है।
