मादुरो विवाद के बाद अमेरिका का बड़ा कदम, रूसी झंडे वाले वेनेजुएला-लिंक्ड तेल टैंकर पर कब्जा

📰 इंटरनेशनल डेस्क | नई दिल्ली

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो से जुड़े घटनाक्रम के बीच अमेरिका ने समुद्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक रूसी ध्वज वाले तेल टैंकर को जब्त कर लिया है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब वॉशिंगटन पहले से ही वेनेजुएला पर लगाए गए प्रतिबंधों को सख्ती से लागू कर रहा है।


⚓ अमेरिकी कार्रवाई डेस्क

अमेरिकी सेना और तटरक्षक बल ने उत्तरी अटलांटिक और कैरिबियन क्षेत्र में ऑपरेशन चलाते हुए वेनेजुएला से जुड़े दो प्रतिबंधित तेल टैंकरों को अपने नियंत्रण में ले लिया।
इनमें से एक जहाज बेला 1, जिसका बाद में नाम बदलकर मरीनरा रखा गया, पर अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करने का आरोप है। इस जहाज का दो हफ्तों से ज्यादा समय तक पीछा किया गया और आखिरकार स्कॉटलैंड व आइसलैंड के बीच समुद्री इलाके में इसे रोका गया।


🚢 दूसरा टैंकर भी जब्त

अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग की ओर से बताया गया कि कैरिबियन सागर में मौजूद सोफिया नामक टैंकर को भी अमेरिकी सेना ने नियंत्रण में ले लिया है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों जहाज या तो हाल ही में वेनेजुएला के बंदरगाहों पर रुके थे या वहां की ओर जा रहे थे।


🛢️ प्रतिबंध और आरोप डेस्क

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि मरीनरा टैंकर को पहले ही 2024 में प्रतिबंधित किया जा चुका था। आरोप है कि यह जहाज एक ऐसी कंपनी के लिए तेल की ढुलाई कर रहा था, जिसका संबंध अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित संगठनों से बताया गया है।
जब्ती के बाद इस जहाज को कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सौंप दिया गया है।


🇷🇺 रूस की प्रतिक्रिया डेस्क

रूस ने इस कार्रवाई पर कड़ी नाराजगी जताई है। रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वह जहाज के आसपास बने हालात पर नजर बनाए हुए था। वहीं, रूस के परिवहन मंत्रालय ने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में टैंकर पर कब्जा किया, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के खिलाफ है।

मंत्रालय के अनुसार, जहाज को रूसी कानून के तहत वैध रूप से ध्वज फहराने की अनुमति दी गई थी और किसी भी देश को खुले समुद्र में इस तरह की कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है।


⚖️ आगे क्या हो सकता है? | एक्सपर्ट डेस्क

विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना अमेरिका और रूस के बीच पहले से तनावपूर्ण रिश्तों को और जटिल बना सकती है। साथ ही, वेनेजुएला से जुड़े तेल व्यापार पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में इस मामले पर कूटनीतिक प्रतिक्रिया और कानूनी बहस तेज होने की संभावना है।

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