💻 टेक डेस्क | डिजिटल सेफ्टी व रेगुलेशन
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) ने भारत सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को उस नोटिस के जवाब में अपनी Action Taken Report (ATR) सौंप दी है, जिसमें एआई टूल Grok से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर चिंता जताई गई थी। मंत्रालय अब इस जवाब की विस्तृत समीक्षा कर रहा है।
📌 क्या है पूरा मामला
2 जनवरी को सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने
- X को नोटिस जारी कर
- महिलाओं और नाबालिगों से जुड़े
- आपत्तिजनक, गैरकानूनी और अनुचित कंटेंट
को तुरंत हटाने के निर्देश दिए थे। खास तौर पर मंत्रालय ने एआई चैटबॉट Grok के दुरुपयोग पर गंभीर सवाल उठाए थे।
⏳ एक्सटेंडेड डेडलाइन के बाद सौंपा गया जवाब
- मंत्रालय ने X को अतिरिक्त समय देते हुए
- बुधवार शाम 5 बजे तक
- ATR जमा करने को कहा था
निर्धारित समयसीमा के भीतर X ने अपना जवाब सौंप दिया है। सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल मंत्रालय इस रिपोर्ट की जांच कर रहा है, हालांकि कंपनी द्वारा साझा की गई जानकारी का पूरा विवरण अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।
🧠 जांच का फोकस: Grok AI का दुरुपयोग
सरकारी सूत्रों के अनुसार, जांच इस बात पर केंद्रित है कि:
- क्या प्लेटफॉर्म यूजर्स को आपत्तिजनक एआई-जनरेटेड कंटेंट बनाने से रोकने में विफल रहा
- क्या Grok से जुड़े पर्याप्त तकनीकी और संगठनात्मक सुरक्षा उपाय मौजूद थे
- उल्लंघन करने वाले अकाउंट्स और यूजर्स पर क्या कार्रवाई की गई
⚖️ सरकार की चेतावनी और कानूनी पक्ष
मंत्रालय ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया था कि:
- सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और उससे जुड़े नियमों का पालन अनिवार्य है
- धारा 79 के तहत मिलने वाली “सेफ हार्बर” सुरक्षा
👉 सख्त अनुपालन पर ही निर्भर करती है
नियमों के उल्लंघन की स्थिति में
- आईटी अधिनियम
- और भारतीय न्याय संहिता
के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
🛡️ X का पक्ष: सहयोग और सख्त नीति का दावा
इससे पहले X ने अपने Safety Handle पर बयान जारी कर कहा था कि:
- वह अवैध कंटेंट के खिलाफ सख्त नीति अपनाता है
- उल्लंघन पाए जाने पर अकाउंट सस्पेंड किए जाते हैं
- और जरूरत पड़ने पर कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग किया जाता है
🔮 आगे क्या होगा
अब सबकी नजर इस पर है कि:
- मंत्रालय X के जवाब को पर्याप्त मानता है या नहीं
- Grok AI के लिए अतिरिक्त रेगुलेटरी गाइडलाइंस जारी होती हैं या नहीं
यह मामला भारत में AI गवर्नेंस और प्लेटफॉर्म जिम्मेदारी को लेकर एक अहम उदाहरण माना जा रहा है।
✨ निष्कर्ष
यह घटनाक्रम दिखाता है कि
AI-आधारित टूल्स के बढ़ते उपयोग के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है।
सरकार और टेक कंपनियों के बीच यह संवाद आने वाले समय में डिजिटल सेफ्टी फ्रेमवर्क को और मजबूत कर सकता है।
