ईरान में उबाल चरम पर: महंगाई से शुरू हुआ आंदोलन अब सत्ता के खिलाफ विद्रोह में बदला

🌍 इंटरनेशनल डेस्क | मध्य-पूर्व संकट


🇮🇷 31 प्रांतों में फैला जनआंदोलन

ईरान इस वक्त गंभीर आर्थिक दबाव और राजनीतिक असंतोष के दौर से गुजर रहा है।
महंगाई, बेरोजगारी और कमजोर मुद्रा ने जनता के आक्रोश को सड़कों पर ला दिया है।
सरकार द्वारा इंटरनेट और फोन सेवाओं पर पाबंदियों के बावजूद विरोध प्रदर्शन लगातार तेज हो रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह 2022 के बाद सबसे बड़ा देशव्यापी आंदोलन माना जा रहा है, जो अब ईरान के सभी 31 प्रांतों तक फैल चुका है।


⚠️ मौतें और गिरफ्तारियां: हालात गंभीर

अलग-अलग स्रोतों के अनुसार:

  • कम से कम 65 लोगों की मौत की पुष्टि
  • 2,300 से अधिक लोग हिरासत में
  • करीब 180 शहरों में प्रदर्शन

कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में मृतकों की संख्या इससे कहीं अधिक बताई जा रही है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अलग-अलग आंकड़े पेश कर रही है।


महिलाएं बनीं आंदोलन की सबसे बड़ी आवाज

इस बार विरोध प्रदर्शनों की सबसे खास बात है महिलाओं की खुली भागीदारी
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और तस्वीरों में महिलाएं ऐसे प्रतीकात्मक विरोध करती दिख रही हैं, जो अब तक ईरान में अकल्पनीय माने जाते थे।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह केवल विरोध नहीं बल्कि डर से मुक्ति और सत्ता को खुली चुनौती का संकेत है।


🗣️ नारों में झलक रहा व्यवस्था से मोहभंग

प्रदर्शनकारियों के नारों से साफ है कि आंदोलन अब केवल आर्थिक मांगों तक सीमित नहीं रहा।
कई शहरों में लोग मौजूदा शासन व्यवस्था पर सवाल उठाते नजर आ रहे हैं और व्यापक बदलाव की मांग कर रहे हैं।


🧠 विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि:

  • यह आंदोलन युवाओं और महिलाओं के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है
  • मौजूदा सत्ता के लिए यह वैचारिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चुनौती बन चुका है
  • दमन के बावजूद विरोध का जारी रहना हालात की गंभीरता दिखाता है

📌 निष्कर्ष

ईरान में शुरू हुआ यह आंदोलन अब केवल महंगाई या बेरोजगारी का विरोध नहीं रह गया है।
यह व्यवस्था, नियंत्रण और सामाजिक बंदिशों के खिलाफ व्यापक असंतोष की तस्वीर पेश कर रहा है, जिसमें महिलाओं की भूमिका निर्णायक बनती जा रही है।

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