Pune–PCMC Civic Polls: चाचा-भतीजे की रणनीति धरी रह गई, बीजेपी ने दोनों शहरों में बनाई बड़ी बढ़त

🗂️ श्रेणी: राजनीति | महाराष्ट्र | नगर निगम चुनाव


🔔 पुणे और पिंपरी-चिंचवड में बदला सियासी संतुलन

महाराष्ट्र महानगरपालिका चुनावों की मतगणना के शुरुआती रुझानों ने साफ कर दिया है कि पुणे और पिंपरी-चिंचवड में एनसीपी की पकड़ कमजोर पड़ी है। चाचा शरद पवार और भतीजे अजित पवार की एकजुट रणनीति भी भारतीय जनता पार्टी की रफ्तार को रोक नहीं सकी। दोनों प्रमुख शहरी इलाकों में बीजेपी निर्णायक बढ़त बनाती दिख रही है।


♟️ एनसीपी के गढ़ में बीजेपी की सेंध

कभी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का मजबूत किला माने जाने वाले पुणे और पिंपरी-चिंचवड में इस बार राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदलती नजर आई।

  • पुणे में भाजपा 110 से ज्यादा सीटों पर आगे
  • एनसीपी (अजित पवार गुट) सिर्फ सीमित सीटों तक सिमटी
  • शरद पवार गुट की मौजूदगी बेहद कमजोर

इन आंकड़ों ने साफ कर दिया कि शहरी मतदाताओं का रुझान इस बार भाजपा की ओर ज्यादा रहा।


⚖️ महायुति में अजित पवार की ताकत पर सवाल

इन नतीजों के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि महायुति गठबंधन में अजित पवार का राजनीतिक वजन घट सकता है। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने स्थानीय स्तर पर बीजेपी नेतृत्व पर भ्रष्टाचार और विकास में बाधा के आरोप लगाए थे, लेकिन मतदाताओं ने इन हमलों को खास तवज्जो नहीं दी।


🎤 तेज प्रचार, लेकिन असर सीमित

अजित पवार ने

  • मेट्रो और बसों में मुफ्त सफर
  • छोटे घरों को प्रॉपर्टी टैक्स में राहत
  • जलापूर्ति सुधार जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाया

इसके बावजूद बीजेपी ने इन वादों को “चुनावी मजबूरी” करार दिया और मतदाताओं के बीच अपना भरोसा बनाए रखने में सफल रही।


🧩 बीजेपी की रणनीति और मजबूत संगठन

बीजेपी ने स्थानीय नेतृत्व, संगठनात्मक ताकत और शहरी विकास के एजेंडे को केंद्र में रखकर चुनाव लड़ा। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की सक्रिय भूमिका और स्थानीय सांसद-विधायकों की मौजूदगी ने पार्टी को निर्णायक बढ़त दिलाने में अहम भूमिका निभाई।


📉 एनसीपी ने स्वीकार की हार

एनसीपी के स्थानीय नेताओं ने नतीजों को विनम्रता से स्वीकार करते हुए कहा कि पार्टी ने मुद्दों के आधार पर चुनाव लड़ा, लेकिन जनता का फैसला उनके पक्ष में नहीं गया। वहीं, चुनाव के दौरान सामने आए विवादों और आरोपों ने भी पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाया।


📌 निष्कर्ष

पुणे और पिंपरी-चिंचवड के नगर निगम चुनावों ने यह संकेत दे दिया है कि शहरी महाराष्ट्र में बीजेपी की पकड़ और मजबूत हुई है, जबकि एनसीपी को अपने पारंपरिक गढ़ों में भी संघर्ष करना पड़ रहा है। चाचा-भतीजे की सियासी साझेदारी भी इस बार भाजपा के चुनावी मैनेजमेंट के सामने टिक नहीं सकी।

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