अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ी मोबाइल कंपनी Trump Mobile इन दिनों विवादों में आ गई है। कंपनी द्वारा लॉन्च किए गए स्मार्टफोन Trump Mobile T1 को लेकर ग्राहकों की बढ़ती शिकायतों के बाद अब अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमीशन (FTC) ने औपचारिक जांच शुरू कर दी है।
⏳ प्री-बुकिंग हुई, डिलीवरी अब तक नहीं
Trump Mobile T1 को पिछले साल जून में लॉन्च किया गया था और इसके लिए प्री-ऑर्डर भी खोले गए थे।
- फोन की शुरुआती कीमत लगभग 499 डॉलर रखी गई
- बुकिंग के लिए 100 डॉलर की सिक्योरिटी डिपॉजिट ली गई
- लेकिन कई महीनों बाद भी ग्राहकों को फोन नहीं मिला
🧾 ग्राहकों की शिकायतों से बढ़ा मामला
कुछ यूजर्स ने दावा किया है कि:
- 6 से 7 महीने बीतने के बावजूद फोन डिलीवर नहीं हुआ
- कंपनी की ओर से कोई स्पष्ट अपडेट नहीं दिया गया
- सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में असंतोष जताया गया
इन्हीं शिकायतों के आधार पर FTC ने मामले को गंभीरता से लिया है।
🔍 FTC ने कंपनी से पूछे अहम सवाल
फेडरल ट्रेड कमीशन ने Trump Mobile को भेजे गए पत्र में कई बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है, जिनमें शामिल हैं:
- फोन की डिलीवरी में हो रही देरी का कारण
- प्रचार से ‘Made in America’ टैग हटाने की वजह
- प्रमोशनल इमेज और रेंडर को लेकर भ्रामक दावों की सच्चाई
FTC का कहना है कि उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ी शिकायतों को किसी भी कंपनी के मामले में समान रूप से देखा जाएगा।
📢 भ्रामक प्रचार के आरोप
कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि:
- फोन के प्रचार में अन्य प्रीमियम स्मार्टफोन्स जैसी तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया
- वास्तविक प्रोडक्ट को लेकर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई
इन्हीं कारणों से पूरे मामले पर संदेह और गहराता जा रहा है।
⚙️ Trump Mobile T1 के घोषित फीचर्स
कंपनी के दावों के मुताबिक फोन में:
- 6.8-इंच AMOLED डिस्प्ले (120Hz)
- ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप
- Android 15 सपोर्ट
- 5000mAh बैटरी और AI फीचर्स
हालांकि, ये सभी फीचर्स अभी कागज़ों तक ही सीमित बताए जा रहे हैं।
📡 मोबाइल सर्विस प्लान भी चर्चा में
Trump Mobile ने फोन के साथ एक सब्सक्रिप्शन प्लान भी घोषित किया था, जिसमें:
- अनलिमिटेड कॉलिंग और डेटा
- इंटरनेशनल कॉलिंग
- हेल्थ और रोडसाइड असिस्टेंस जैसी सेवाओं का दावा
लेकिन फोन की अनुपलब्धता के चलते यह प्लान भी सवालों के घेरे में है।
📝 निष्कर्ष
Trump Mobile T1 से जुड़ा मामला अब सिर्फ तकनीक या डिलीवरी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि उपभोक्ता अधिकार और पारदर्शिता से जुड़ा मुद्दा बन गया है। FTC की जांच के बाद ही साफ होगा कि यह देरी प्रशासनिक चूक है या कोई गंभीर व्यावसायिक अनियमितता।
