ग्रीनलैंड को लेकर वैश्विक राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लगातार बयानों के बीच अब रूस ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। रूस के विदेश मंत्री ने न केवल ग्रीनलैंड में किसी भी तरह की रुचि से इनकार किया, बल्कि इसके ऐतिहासिक दावे को लेकर भी बड़ा बयान दिया है।
🏛️ रूस का आधिकारिक पक्ष: कोई दखल नहीं
मॉस्को से आए बयान में रूस के विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि ग्रीनलैंड को लेकर रूस की कोई रणनीतिक या राजनीतिक दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को लेकर लगाए जा रहे तमाम आरोप निराधार हैं और रूस इस विवाद से खुद को अलग रखता है।
📜 इतिहास का हवाला: ‘नेचुरल पार्ट’ नहीं रहा ग्रीनलैंड
रूसी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि ग्रीनलैंड कभी भी डेनमार्क या नॉर्वे का स्वाभाविक हिस्सा नहीं रहा, बल्कि यह उपनिवेशवादी इतिहास की एक कड़ी है। इस बयान ने यूरोप और अमेरिका के बीच चल रही बहस को और गहरा कर दिया है।
🇺🇸 ट्रंप की योजना को मिला अप्रत्यक्ष समर्थन?
हालांकि रूस ने सीधे तौर पर किसी देश का समर्थन नहीं किया, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान से ट्रंप की रणनीति को अप्रत्यक्ष बल मिल सकता है। ट्रंप पहले ही ग्रीनलैंड को लेकर अपने इरादे सार्वजनिक कर चुके हैं और विरोध करने वाले यूरोपीय देशों पर आर्थिक दबाव बनाने की बात भी कह चुके हैं।
🇪🇺 यूरोप की चिंता और नाटो पर असर
ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका के रुख से कई यूरोपीय देश असहज हैं। माना जा रहा है कि अगर यह विवाद और बढ़ता है, तो इसका असर नाटो जैसे सैन्य गठबंधन पर भी पड़ सकता है। यूरोप के देश इस मुद्दे पर एकजुट होकर अमेरिका के कदमों पर नजर बनाए हुए हैं।
⚖️ आगे क्या?
फिलहाल ग्रीनलैंड को लेकर स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। रूस का बयान भले ही तटस्थता दर्शाता हो, लेकिन इससे अमेरिका और यूरोप के बीच पहले से मौजूद तनाव और गहराने की आशंका जताई जा रही है।
📌 निष्कर्ष
ग्रीनलैंड अब केवल एक भूभाग नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन का प्रतीक बनता जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि कूटनीतिक बातचीत इस मुद्दे को किस दिशा में ले जाती है।
