हरियाणा के सोनीपत दौरे पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संत, संन्यास और सनातन पर अपने विचार खुलकर रखे। हालिया अविमुक्तेश्वरानंद विवाद के संदर्भ में दिए गए इस बयान में उन्होंने धर्म, राष्ट्र और सामाजिक जिम्मेदारी को प्रमुखता से जोड़ा।
🕉️ संन्यासी और संत पर योगी का दृष्टिकोण
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि संन्यासी और संत का जीवन निजी स्वार्थ से ऊपर होता है।
- संन्यासी की कोई व्यक्तिगत संपत्ति नहीं होती
- राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है
- धर्म उनके लिए सर्वोपरि होता है
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग धर्म की आड़ में सनातन पर सवाल खड़े करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे समाज को सतर्क रहने की जरूरत है।
🏹 राम मंदिर और प्रयागराज का उदाहरण
सीएम योगी ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का जिक्र करते हुए कहा कि जो कभी असंभव लगता था, वह अब साकार हो चुका है।
साथ ही प्रयागराज के माघ मेले का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि मौनी अमावस्या पर साढ़े चार करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं की उपस्थिति भारत की आध्यात्मिक शक्ति को दर्शाती है।
🌍 आस्था, नेतृत्व और भारत की पहचान
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का एकत्र होना न केवल संत परंपरा की शक्ति है, बल्कि सुशासन और नेतृत्व का परिणाम भी है।
उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक पहचान आने वाले हजार वर्षों तक मजबूत बनी रहनी चाहिए।
👥 युवाओं पर विशेष संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी देश का भविष्य उसके युवाओं से तय होता है।
- अगर युवा सकारात्मक सोच और समाज के लिए कुछ करने की भावना रखते हैं, तो देश आगे बढ़ता है
- निराश और हताश युवा किसी भी राष्ट्र के लिए चिंता का विषय होते हैं
उन्होंने युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ न करने की बात पर जोर दिया।
ICC T20 World Cup 2026: पाकिस्तान का निर्णय अभी भी अटका, टीम ऐलान नहीं
