विभाग: टेक्नोलॉजी / सोशल मीडिया / राज्य नीति
देश में नाबालिगों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर बहस अब तेज़ होती जा रही है। आंध्र प्रदेश के बाद अब गोवा भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पाबंदी लगाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहा है। यह कदम ऑस्ट्रेलिया के मॉडल से प्रेरित माना जा रहा है, जहां बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ऐसा कानून लागू किया गया है।
🏖️ गोवा क्यों कर रहा है सोशल मीडिया बैन पर विचार?
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा सरकार का मानना है कि
- बच्चों पर डिजिटल प्लेटफॉर्म का असर बढ़ता जा रहा है
- मानसिक स्वास्थ्य और ऑनलाइन सेफ्टी को लेकर चिंता गंभीर होती जा रही है
गोवा के आईटी और ई-गवर्नेंस मंत्री रोहन खुंटे ने संकेत दिया है कि
अगर संभव हुआ तो 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सकती है।
हालांकि, अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है और विस्तृत जानकारी बाद में साझा की जाएगी।
📘 आंध्र प्रदेश में पहले से चल रही तैयारी
- आंध्र प्रदेश सरकार पहले ही इस दिशा में कदम बढ़ा चुकी है
- शिक्षा मंत्री नारा लोकेश ने वरिष्ठ मंत्रियों की एक कमिटी बनाई है
- यह कमिटी ग्लोबल मॉडल्स का अध्ययन कर सिफारिशें देगी
सरकार का फोकस है एक मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करना।
⚖️ कानूनी चुनौती भी है सामने
- सोशल मीडिया रेगुलेशन केंद्र सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है
- ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या राज्य अपने स्तर पर कानून बना सकते हैं
गोवा सरकार ने साफ किया है कि
कोई भी फैसला लेने से पहले एक्सपर्ट्स से सलाह ली जाएगी।
🌏 ऑस्ट्रेलिया बना ग्लोबल उदाहरण
- ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह बैन लगाया
- पहले ही महीने में करीब 47 लाख टीन अकाउंट्स डीएक्टिवेट किए गए
- फ्रांस, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देश भी इस मॉडल पर नजर रखे हुए हैं
🔍 आगे क्या?
गोवा और आंध्र प्रदेश की पहल से भारत में एक बड़ी बहस छिड़ सकती है—
बच्चों की डिजिटल सुरक्षा बनाम ऑनलाइन आज़ादी।
आने वाले समय में यह मुद्दा टेक्नोलॉजी, पॉलिसी और पेरेंटिंग तीनों स्तरों पर अहम रहने वाला है।
