🏛️ राजनीति / उत्तर प्रदेश
वाराणसी में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उत्तर प्रदेश सरकार के सामने 40 दिनों का समय तय करते हुए कई मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि यदि इस अवधि में गाय को ‘राज्यमाता’ घोषित नहीं किया गया और गोमांस निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया, तो संत समाज आगे की रणनीति तय करेगा। यह बयान राज्य की राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है।
🕉️ धर्म / संत समाज
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह मुद्दा किसी व्यक्तिगत पद या पहचान का नहीं, बल्कि सनातन परंपरा और धार्मिक मूल्यों की रक्षा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने तर्क दिया कि जब अन्य राज्यों में गाय को विशेष दर्जा दिया गया है, तो उत्तर प्रदेश जैसे धार्मिक महत्व वाले राज्य में इस विषय पर ठोस कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे।
🐮 सामाजिक मुद्दे / गोवंश संरक्षण
उन्होंने मांग की कि उत्तर प्रदेश में गोवंश की हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए और पशुओं की सुरक्षा के लिए सख्त नियम लागू किए जाएं। साथ ही, मांस निर्यात से जुड़े मामलों की पारदर्शी जांच की बात भी कही, ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोका जा सके।
📦 व्यापार / निर्यात
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दावा किया कि देश के कुल मांस निर्यात में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से अधिक है। उन्होंने मांग की कि राज्य से होने वाले सभी प्रकार के बोवाइन मीट (Bovine Meat) के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए और इस क्षेत्र में सख्त निगरानी तंत्र बनाया जाए।
⚖️ प्रशासन / बयानबाज़ी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की ओर से उनसे शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा गया था, जो उपलब्ध करा दिया गया है। उनका कहना है कि अब सरकार को भी अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। हालांकि इस पूरे मामले पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
🔍 निष्कर्ष
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की मांगों ने उत्तर प्रदेश की राजनीति, धर्म और सामाजिक विमर्श को एक बार फिर केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि राज्य सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या इन मांगों पर कोई आधिकारिक निर्णय लिया जाता है।
