इजरायल के विस्तार पर अमेरिकी राजदूत का विवादित बयान, मिडिल ईस्ट को लेकर टिप्पणी से मचा हंगामा

मध्य पूर्व की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। इजरायल में अमेरिका के राजदूत माइक हकाबी ने ऐसा बयान दिया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय बहस को तेज कर दिया है। एक इंटरव्यू के दौरान हकाबी ने कहा कि अगर इजरायल मिडिल ईस्ट के बड़े हिस्से पर नियंत्रण कर लेता है, तो उन्हें इस पर कोई आपत्ति नहीं होगी।


🎙️ टकर कार्लसन के इंटरव्यू में आया बयान

यह बयान हकाबी ने मशहूर अमेरिकी पत्रकार टकर कार्लसन के साथ बातचीत के दौरान दिया। इंटरव्यू में इजरायल की भौगोलिक सीमाओं को लेकर सवाल किया गया था, जिस पर हकाबी ने धार्मिक संदर्भों का हवाला दिया। उन्होंने बाइबिल में वर्णित उस व्याख्या का जिक्र किया, जिसमें अब्राहम के वंशजों को नील नदी से लेकर यूफ्रेट्स नदी तक की भूमि दिए जाने की बात कही गई है।

इस दायरे में आज के समय का लेबनान, सीरिया, जॉर्डन और सऊदी अरब के कुछ हिस्से भी आते हैं। इस संदर्भ में हकाबी ने कहा, “अगर वे यह सब ले लें तो कोई दिक्कत नहीं होगी।”
हालांकि, इस टिप्पणी से टकर कार्लसन भी हैरान नजर आए और उन्होंने दोबारा स्पष्ट सवाल किया कि क्या वे वास्तव में इतने बड़े क्षेत्र में इजरायल के विस्तार का समर्थन करते हैं।


🔄 बाद में बदले सुर

राजदूत हकाबी ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि यह टिप्पणी “कुछ हद तक अतिशयोक्तिपूर्ण” थी। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इजरायल न तो इस तरह के विस्तार की मांग कर रहा है और न ही उस पर कब्जा करने की इच्छा जता रहा है। फिर भी, उनकी धार्मिक व्याख्या के आधार पर इजरायली विस्तारवाद की संभावना को उन्होंने पूरी तरह खारिज भी नहीं किया।


📜 अंतरराष्ट्रीय कानून पर सवाल

इंटरव्यू के दौरान हकाबी ने यह तर्क भी दिया कि इजरायल के अस्तित्व का अधिकार अंतरराष्ट्रीय कानून में निहित है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं पर इजरायल के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
हकाबी ने कहा कि वे आईसीसी और आईसीजे जैसी संस्थाओं की आलोचना से सहमत हैं, क्योंकि उनके अनुसार ये संगठन कानून को निष्पक्ष रूप से लागू नहीं कर रहे।


🇺🇸 ट्रंप प्रशासन का समर्थन

हकाबी ने इस मुद्दे पर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री रुबियो के प्रयासों की सराहना की। उनका कहना था कि इन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से दूरी बनाने की कोशिश इसलिए जरूरी है क्योंकि ये अब “भ्रष्ट” हो चुकी हैं और कानून का समान रूप से पालन नहीं कर रही हैं।


🌍 अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

मीडिया रिपोर्ट्स, जिनमें अल जजीरा भी शामिल है, के मुताबिक हकाबी के इस बयान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान मध्य पूर्व में पहले से तनावपूर्ण हालात को और जटिल बना सकते हैं।


🔎 निष्कर्ष

माइक हकाबी का यह बयान भले ही बाद में नरम शब्दों में पेश किया गया हो, लेकिन इससे यह साफ है कि इजरायल और मिडिल ईस्ट को लेकर अमेरिका के भीतर भी वैचारिक मतभेद गहरे हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह बयान सिर्फ व्यक्तिगत राय बनकर रह जाता है या अमेरिकी विदेश नीति पर इसका कोई असर पड़ता है।

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