सोना और चांदी अब सिर्फ गहनों या पारंपरिक निवेश तक सीमित नहीं रहे। म्यूचुअल फंड और ETF के जरिए ये दोनों धातुएं आज लाखों निवेशकों के पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बन चुकी हैं। ऐसे में इनकी सही, पारदर्शी और बाजार के अनुरूप वैल्यू तय करना बेहद जरूरी हो जाता है। इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए मार्केट रेगुलेटर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने गोल्ड और सिल्वर ETF के वैल्यूएशन नियमों में बड़ा बदलाव किया है। ये नए नियम 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे।
🔎 क्यों जरूरी था बदलाव?
अब तक गोल्ड और सिल्वर ETF में रखे गए फिजिकल बुलियन का मूल्यांकन मुख्य रूप से विदेशी बाजारों पर आधारित था। इससे भारतीय निवेशकों के लिए यह सवाल बना रहता था कि क्या ETF की कीमत वाकई घरेलू बाजार की वास्तविक स्थिति को सही तरह से दर्शा रही है या नहीं। SEBI का मानना है कि जब निवेश भारतीय बाजार में हो रहा है, तो वैल्यूएशन भी भारतीय कीमतों के ज्यादा करीब होना चाहिए।
🪙 अब तक कैसे होती थी वैल्यूएशन?
मौजूदा व्यवस्था में गोल्ड और सिल्वर ETF की कीमत तय करने के लिए लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA) की AM फिक्सिंग प्राइस को आधार बनाया जाता था। यह कीमत अमेरिकी डॉलर में होती थी।
इसके बाद इस डॉलर कीमत को भारतीय रुपये में बदला जाता था और फिर इसमें ट्रांसपोर्ट खर्च, कस्टम ड्यूटी, टैक्स और अन्य घरेलू लागत जोड़कर ETF की अंतिम वैल्यू तय की जाती थी। यानी कीमत की बुनियाद विदेशी बाजार में होती थी, जिसे बाद में भारतीय परिस्थितियों के अनुसार एडजस्ट किया जाता था।
🆕 नए नियम में क्या बदलेगा?
SEBI ने म्यूचुअल फंड एडवाइजरी कमेटी से चर्चा और सार्वजनिक परामर्श के बाद यह फैसला लिया है कि अब गोल्ड और सिल्वर का वैल्यूएशन भारतीय बाजार में तय होने वाली कीमतों के आधार पर किया जाएगा।
नए नियमों के तहत, म्यूचुअल फंड में रखे गए फिजिकल गोल्ड और सिल्वर का मूल्यांकन अब मान्यता प्राप्त भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा प्रकाशित ‘पोल्ड स्पॉट प्राइस’ के आधार पर होगा।
यही स्पॉट प्राइस उन डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के सेटलमेंट में भी इस्तेमाल होती है, जिनमें असली सोने और चांदी की फिजिकल डिलीवरी दी जाती है। इसका मतलब यह है कि ETF की वैल्यू सीधे उसी कीमत से जुड़ेगी, जिस पर उस समय भारतीय बाजार में सोना और चांदी खरीदी–बेची जा रही होगी।
📊 AMFI बनाएगा एक समान प्रक्रिया
SEBI ने यह भी साफ किया है कि इस बदलाव को लागू करने के लिए एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) एक समान और स्टैंडर्ड प्रक्रिया तय करेगा। यह प्रक्रिया SEBI के परामर्श से बनाई जाएगी, ताकि सभी म्यूचुअल फंड हाउस एक ही नियम के तहत गोल्ड और सिल्वर का वैल्यूएशन करें। इससे अलग-अलग स्कीमों के बीच कीमतों में अंतर कम होगा और निवेशकों को ज्यादा स्पष्टता मिलेगी।
👥 निवेशकों पर क्या पड़ेगा असर?
इस बदलाव का सीधा असर उन निवेशकों पर पड़ेगा, जिन्होंने गोल्ड ETF, सिल्वर ETF या ऐसी म्यूचुअल फंड स्कीमों में निवेश किया है, जो फिजिकल बुलियन रखती हैं।
नई व्यवस्था में ETF का NAV घरेलू स्पॉट प्राइस से ज्यादा जुड़ा होगा, जिससे कीमतें भारतीय बाजार की वास्तविक स्थिति को बेहतर तरीके से दर्शाएंगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, वैल्यूएशन में एकरूपता आएगी और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।
📌 निष्कर्ष
SEBI का यह कदम गोल्ड और सिल्वर में निवेश को ज्यादा पारदर्शी, भरोसेमंद और भारतीय बाजार के अनुरूप बनाने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले ये नियम लंबे समय में निवेशकों के लिए बेहतर मूल्य खोज (price discovery) और ज्यादा स्पष्ट NAV सुनिश्चित कर सकते हैं।
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