विभाग: 🗳️ राजनीति / राष्ट्रीय राजनीति
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंगलवार को कोलकाता में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की। इस मुलाकात को देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
🤝 40 मिनट की बैठक, साझा रणनीति पर चर्चा
विभाग: 🧭 राजनीतिक मुलाकात
अखिलेश यादव और ममता बनर्जी के बीच करीब 40 मिनट तक बातचीत हुई। बैठक के बाद अखिलेश यादव ने कहा कि मौजूदा समय में अगर कोई नेता मजबूती के साथ भाजपा का सामना कर रहा है, तो वह ममता बनर्जी हैं। उन्होंने लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई में ममता को अपना समर्थन देने की बात भी कही।
⚖️ ED और केंद्रीय एजेंसियों के मुद्दे पर ममता की तारीफ
विभाग: 🏛️ राजनीतिक बयान
अखिलेश यादव ने हाल ही में I-PAC से जुड़े मामलों में हुई ईडी की कार्रवाई का जिक्र करते हुए कहा कि ममता बनर्जी ने राजनीतिक दबावों का डटकर सामना किया है। उन्होंने टिप्पणी की कि जिस तरह ममता ने केंद्रीय एजेंसियों का मुकाबला किया, उसी आत्मविश्वास के साथ वह आने वाले समय में भाजपा को भी चुनौती देंगी।
🗣️ BJP और SIR मुद्दे पर तीखा हमला
विभाग: ⚠️ चुनावी राजनीति
अखिलेश यादव ने SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया का मकसद चुनाव से पहले आम लोगों को परेशान करना और मतदान प्रतिशत को प्रभावित करना हो सकता है। उनके मुताबिक, चुनाव आयोग की जिम्मेदारी मतदाताओं की संख्या बढ़ाने की होती है, न कि उसे सीमित करने की।
🏹 ममता बनर्जी के संघर्ष को बताया मिसाल
विभाग: 🌍 विपक्षी राजनीति
अखिलेश यादव ने कहा कि CAA-NRC जैसे मुद्दों से लेकर चुनावी प्रक्रियाओं तक, ममता बनर्जी ने हर स्तर पर केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध किया है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को इसी तरह एकजुट होकर लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करनी चाहिए।
🧾 दिल्ली में SIR के खिलाफ आंदोलन की तैयारी
विभाग: 🚨 राजनीतिक आंदोलन
बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी SIR के मुद्दे को लेकर इसे राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी में हैं। संभावित रूप से वह दिल्ली आकर चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर सकती हैं। इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस को समर्थन देने की बात कही है।
🔎 निष्कर्ष
अखिलेश यादव और ममता बनर्जी की यह मुलाकात विपक्षी राजनीति में नई सक्रियता का संकेत मानी जा रही है। आने वाले दिनों में यह सहयोग किस रूप में सामने आता है, इस पर देश की राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।
