बोर्ड ऑफ पीस में पाकिस्तान क्यों दिखा बेअसर? मंच पर मौजूदगी रही, लेकिन योगदान नदारद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर गठित बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में पाकिस्तान की मौजूदगी भले ही चर्चा में रही, लेकिन असली सवाल यह उठा कि आखिर पाकिस्तान इस मंच पर लेकर क्या गया था। बैठक में शामिल कई देशों ने जहां शांति स्थापना के लिए ठोस प्रतिबद्धताएं पेश कीं, वहीं पाकिस्तान का पक्ष कमजोर और अस्पष्ट नजर आया।


🌍 बोर्ड ऑफ पीस का उद्देश्य क्या है?

बोर्ड ऑफ पीस का मुख्य लक्ष्य गाजा में स्थायी शांति बहाल करना, पुनर्निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग जुटाना और जरूरत पड़ने पर एक अंतरराष्ट्रीय शांति सेना तैनात करना है। इस मंच पर शामिल देशों से साफ तौर पर दो तरह के सहयोग की अपेक्षा की गई—आर्थिक सहायता और सैन्य योगदान


🇵🇰 पाकिस्तान की मौजूदगी, लेकिन एजेंडा गायब

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बैठक में हिस्सा जरूर लिया, लेकिन पाकिस्तान की ओर से किसी ठोस वित्तीय या सैन्य सहयोग की घोषणा नहीं की गई। जानकारों का मानना है कि आर्थिक संकट से जूझ रहा पाकिस्तान न तो अरबों डॉलर की मदद देने की स्थिति में है और न ही गाजा के लिए अपने सैनिक भेजने को तैयार दिखा।


📸 ग्रुप फोटो में भी दिखी हकीकत

बैठक के दौरान जारी ग्रुप फोटो ने भी काफी कुछ बयां कर दिया। जहां ट्रंप के करीब सऊदी अरब, इंडोनेशिया और कतर जैसे देशों के नेता नजर आए, वहीं शहबाज शरीफ भीड़ में एक तरफ खड़े दिखाई दिए। इसे कूटनीतिक हलकों में पाकिस्तान की सीमित भूमिका के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।


💸 दूसरे देशों ने क्या-क्या वादा किया?

बोर्ड ऑफ पीस की बैठक में कई देशों और संस्थाओं ने खुले तौर पर सहयोग की घोषणा की:

  • संयुक्त राज्य अमेरिका: गाजा के पुनर्निर्माण के लिए 10 अरब डॉलर
  • कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात: प्रत्येक ने 1-1 अरब डॉलर
  • संयुक्त राष्ट्र: मानवीय सहायता के लिए 2 अरब डॉलर
  • फीफा: गाजा में खेल परियोजनाओं के लिए 7.5 करोड़ डॉलर

🪖 सैन्य योगदान में भी पाकिस्तान बाहर

इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स (ISF) के लिए लगभग 20,000 सैनिकों की जरूरत बताई गई है।

  • इंडोनेशिया ने अकेले 8000 सैनिक भेजने की घोषणा की
  • मोरक्को, अल्बानिया, कजाकिस्तान और कोसोवो जैसे देशों ने भी सैनिक देने की सहमति जताई
  • लेकिन पाकिस्तान का नाम सैनिक भेजने वाले देशों की सूची में शामिल नहीं है

📉 आर्थिक संकट बना बड़ी बाधा

विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई, विदेशी कर्ज और आंतरिक अस्थिरता से जूझ रहा पाकिस्तान फिलहाल अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़े वादे करने की स्थिति में नहीं है। यही वजह है कि बोर्ड ऑफ पीस जैसे अहम मंच पर उसकी भूमिका औपचारिक उपस्थिति तक सीमित रह गई।


🔍 निष्कर्ष

बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक ने यह साफ कर दिया कि आज वैश्विक मंच पर योगदान ही पहचान बनाता है। जहां कई देशों ने ठोस मदद और स्पष्ट विजन पेश किया, वहीं पाकिस्तान बिना किसी मजबूत एजेंडे के हाशिये पर नजर आया। सवाल अब यह है कि आने वाले समय में पाकिस्तान अपनी आर्थिक और कूटनीतिक स्थिति सुधारकर ऐसे मंचों पर प्रभावी भूमिका निभा पाएगा या नहीं।

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