विभाग: अंतरराष्ट्रीय राजनीति / वैश्विक व्यापार
अमेरिका और कनाडा के रिश्तों में एक बार फिर तनाव देखने को मिल रहा है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के साथ संभावित व्यापार समझौते को लेकर कनाडा को कड़ा संदेश दिया है। उनका कहना है कि अगर कनाडा ने चीन के साथ कोई बड़ा व्यापारिक कदम उठाया, तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई कर सकता है।
⚠️ ट्रंप की सीधी चेतावनी
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर बयान जारी करते हुए कहा कि यदि कनाडा चीन के साथ किसी भी प्रकार का व्यापार समझौता करता है, तो अमेरिका कनाडा से आने वाले उत्पादों पर भारी टैरिफ लगा सकता है।
ट्रंप का आरोप है कि कनाडा, चीन के लिए अमेरिका तक सामान पहुंचाने का जरिया बन सकता है, जिसे अमेरिका स्वीकार नहीं करेगा।
🛡️ सुरक्षा मुद्दे पर भी टकराव
इससे पहले ट्रंप, अमेरिका के प्रस्तावित मिसाइल डिफेंस प्रोजेक्ट को लेकर भी कनाडा से नाराज़गी जता चुके हैं। उनका कहना है कि यह परियोजना कनाडा की सुरक्षा में भी मददगार हो सकती थी, लेकिन कनाडा ने इसका समर्थन नहीं किया।
ट्रंप ने यह भी आरोप लगाया कि कनाडा सुरक्षा सहयोग की बजाय चीन के साथ संबंधों को प्राथमिकता दे रहा है।
🌍 दावोस बयान बना तनाव की वजह?
विशेषज्ञों के अनुसार, हालिया विवाद की जड़ दावोस वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का बयान भी है।
कार्नी ने अमेरिका के नेतृत्व वाली वैश्विक व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा था कि दुनिया अब बड़े बदलाव के दौर में है और मध्यम ताकत वाले देशों को मिलकर अपनी भूमिका तय करनी होगी। इस बयान को अमेरिका विरोधी रुख के तौर पर देखा गया।
❓ अब कनाडा के सामने क्या विकल्प?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद कनाडा के सामने कूटनीतिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती है।
- एक ओर अमेरिका उसका सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है
- दूसरी ओर चीन के साथ आर्थिक रिश्ते भी अहम हैं
विश्लेषकों का मानना है कि कनाडा कोई भी कदम सोच-समझकर उठाएगा ताकि दोनों वैश्विक ताकतों के बीच संतुलन बना रहे।
📝 निष्कर्ष
अमेरिका-कनाडा-चीन के बीच यह खींचतान आने वाले समय में वैश्विक व्यापार और राजनीति को प्रभावित कर सकती है। ट्रंप की चेतावनी भले ही सख्त हो, लेकिन कनाडा की रणनीति तय करेगी कि आगे रिश्ते किस दिशा में जाते हैं।
भारत-अमेरिका ट्रेड में नरमी के संकेत? टैरिफ पर बयान से बढ़ी हलचल
