दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में गिनी जाने वाली चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) इन दिनों एक नए तरह के संकट से जूझती नजर आ रही है। यह संकट किसी बाहरी दुश्मन की वजह से नहीं, बल्कि सेना के भीतर चल रहे भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के कारण पैदा हुआ है। लंदन स्थित प्रतिष्ठित थिंक टैंक इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) की ताजा रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस अभियान ने चीन की सैन्य कमान व्यवस्था को गहराई से प्रभावित किया है।
📌 रिपोर्ट क्या कहती है?
IISS की वार्षिक ‘मिलिट्री बैलेंस’ रिपोर्ट के अनुसार, चीन की सेना में चल रही व्यापक जांच के चलते उच्च स्तर पर नेतृत्व की गंभीर कमी सामने आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई ने PLA के संरचनात्मक ढांचे को हिला दिया है। बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जांच और बर्खास्तगी के कारण कई अहम पद खाली हो गए हैं। जब तक इन पदों को नहीं भरा जाता, तब तक संगठनात्मक स्तर पर अस्थिरता बनी रह सकती है।
यह पूरा अभियान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में चलाया जा रहा है। जिनपिंग का उद्देश्य सेना को पूरी तरह पेशेवर, अनुशासित और पार्टी के प्रति वफादार बनाना है, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक इसका तात्कालिक असर सेना की कार्यक्षमता पर पड़ता दिख रहा है।
🪖 PLA में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें
रिपोर्ट यह भी बताती है कि PLA में भ्रष्टाचार कोई नई समस्या नहीं है। इसकी जड़ें 1980 और 1990 के दशक तक जाती हैं, जब चीनी सेना बड़े पैमाने पर व्यावसायिक गतिविधियों में शामिल थी। उस दौर में सेना से जुड़े होटल, रियल एस्टेट और अन्य कारोबारों से कई अधिकारियों ने निजी लाभ कमाए। इसका सीधा असर सैन्य अनुशासन और क्षमता पर पड़ा।
शी जिनपिंग ने सत्ता में आने के बाद इस व्यवस्था पर सख्त प्रहार किया। साल 2015 से PLA के बड़े पैमाने पर पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू हुई, जिसमें थिएटर कमांड सिस्टम की स्थापना, सैन्य सेवाओं का पुनर्गठन और भ्रष्ट अधिकारियों को हटाना शामिल रहा। अब तक हजारों अधिकारियों की जांच हो चुकी है, जिनमें दर्जनों जनरल स्तर के अफसर भी शामिल हैं।
⚙️ कई मोर्चों पर असर
IISS की रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्रवाई का प्रभाव सिर्फ एक-दो विभागों तक सीमित नहीं है। सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC), क्षेत्रीय थिएटर कमांड, हथियार खरीद से जुड़ी एजेंसियां और यहां तक कि रक्षा से जुड़े शैक्षणिक संस्थान भी इसकी चपेट में आए हैं। हाल ही में चीन के दो सबसे वरिष्ठ जनरल अनुशासनात्मक जांच के दायरे में आए, जिसे दशकों में सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई माना जा रहा है।
रिपोर्ट यह भी मानती है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से अल्पकालिक अव्यवस्था जरूर पैदा होती है, लेकिन लंबे समय में इससे सेना को अधिक मजबूत और जवाबदेह बनाया जा सकता है।
💰 भारी रक्षा बजट के बावजूद सवाल
दिलचस्प बात यह है कि यह संकट ऐसे समय में सामने आया है, जब चीन का रक्षा बजट लगातार बढ़ रहा है। IISS के अनुसार, 2025 में एशिया के कुल रक्षा खर्च में चीन की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत तक पहुंच गई। चीन का आधिकारिक रक्षा बजट 2025 में 7.2 प्रतिशत बढ़कर करीब 1.67 ट्रिलियन युआन (लगभग 230 अरब डॉलर) हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक खर्च इससे कहीं अधिक है, क्योंकि रिसर्च और डेवलपमेंट को अलग मद में फंड किया जाता है।
PLA आज अफ्रीका और एशिया में सैन्य सहयोग, दक्षिण चीन सागर में द्वीप निर्माण और वैश्विक सैन्य गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही है। बावजूद इसके, सवाल यह है कि क्या नेतृत्व में चल रही उथल-पुथल के बीच चीन की सेना किसी बड़े संघर्ष के लिए पूरी तरह तैयार है?
🔍 अस्थायी संकट या गहरी चुनौती?
IISS की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि मौजूदा प्रभाव अस्थायी हो सकता है और चीन का सैन्य आधुनिकीकरण अभियान आगे भी तेज़ी से जारी रहेगा। लेकिन फिलहाल यह साफ है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग ने चीन की सेना को एक ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां सुधार और अस्थिरता—दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। आने वाले समय में यही तय करेगा कि यह संकट PLA को कमजोर करता है या लंबी दौड़ में और मजबूत।
रश्मिका–विजय की शाही शादी से पहले बड़ा सवाल: कितनी है उम्र का फासला? जानिए ‘विरोश’ की पूरी लव स्टोरी
