पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में खुद अपनी दलील रखी और कहा कि राज्य में चल रही एसआईआर (SIR) प्रक्रिया में कई अनियमितताएँ हो रही हैं।
📝 मुख्य बिंदु:
- इंसाफ नहीं मिल रहा
- ममता ने कहा कि उन्हें और उनकी सरकार को निर्दोष लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने की समस्या पर न्याय नहीं मिल रहा।
- उन्होंने बताया कि चुनाव आयोग जवाब नहीं दे रहा।
- शादी के बाद महिलाओं के नाम हटाए जा रहे
- कुछ महिलाओं के नाम सूची से हटाए गए क्योंकि उन्होंने शादी के बाद अपना उपनाम बदला।
- गरीब लोग दूसरी जगह शिफ्ट होने के कारण भी प्रभावित हो रहे हैं।
- अनियमित लक्षित कार्रवाई
- ममता ने कहा कि केवल पश्चिम बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है, जबकि अन्य राज्यों (जैसे असम) में ऐसी शर्त नहीं है।
- चुनाव आयोग ने बेसिक आधार के अलावा अतिरिक्त सर्टिफिकेट की मांग की।
- सुप्रीम कोर्ट में प्रतिक्रिया
- चीफ जस्टिस ने कहा कि राज्य के पास बड़े वकील उपलब्ध हैं और समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी।
- कोर्ट ने अगली सुनवाई सोमवार को तय की।
- ममता का जोर
- उन्होंने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया सिर्फ नाम हटाने के लिए इस्तेमाल की जा रही है।
- गरीब और महिलाओं के हक़ों की सुरक्षा जरूरी है।
💡 आसान भाषा में मतलब:
ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट में यह बता रही हैं कि मतदाता सूची में गलत तरीके से नाम हटाए जा रहे हैं, खासकर शादीशुदा महिलाओं और गरीब लोगों के। उनका कहना है कि सिर्फ बंगाल को टारगेट किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई सोमवार को तय की है।
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