यूरोपीय संघ ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को अलकायदा और हमास जैसे संगठनों के साथ आतंकवादी सूची में शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह फैसला EU की सामूहिक सहमति के बाद लागू होगा और इसे ईरान पर बढ़ते राजनीतिक दबाव के रूप में देखा जा रहा है।
🇫🇷 यूरोपीय कूटनीति
फ्रांस का समर्थन, इटली के प्रस्ताव को मिला बल
फ्रांस ने औपचारिक रूप से IRGC को EU की आतंकी सूची में शामिल करने का समर्थन कर दिया है। यह प्रस्ताव इटली की अगुवाई में लाया गया था, जिसे अब जर्मनी और स्पेन जैसे प्रमुख यूरोपीय देशों का भी समर्थन मिल चुका है। पहले फ्रांस इस कदम को लेकर सतर्क था, लेकिन अब रुख सख्त हो गया है।
⚖️ मानवाधिकार
विरोध प्रदर्शनों पर कार्रवाई बना मुख्य कारण
EU का यह रुख ईरान में हाल के महीनों में हुए विरोध प्रदर्शनों और उन पर की गई कथित सख्त कार्रवाई से जुड़ा है। यूरोपीय देशों का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग और इंटरनेट बंदी जैसे कदम गंभीर मानवाधिकार चिंताओं को जन्म देते हैं।
🛡️ सुरक्षा और प्रतिबंध नीति
IRGC पर लग सकते हैं यात्रा और आर्थिक प्रतिबंध
अगर IRGC को EU की आतंकी सूची में शामिल किया जाता है, तो उसके सदस्यों पर यात्रा प्रतिबंध, संपत्ति जब्ती और किसी भी तरह की फंडिंग पर रोक लगाई जा सकेगी। यह यूरोपीय परिषद के मौजूदा नियमों के तहत लागू होगा।
🌐 वैश्विक परिप्रेक्ष्य
अमेरिका और सहयोगी देश पहले ही उठा चुके हैं कदम
अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया पहले ही IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित कर चुके हैं। अब EU के इस संभावित फैसले से पश्चिमी देशों का रुख और ज्यादा एकजुट दिखाई देगा, जबकि ईरान-यूरोप संबंधों पर इसका असर पड़ सकता है।
🔍 आगे क्या?
ईरान की प्रतिक्रिया और क्षेत्रीय असर पर नजर
EU के इस फैसले पर ईरान की आधिकारिक प्रतिक्रिया और मध्य-पूर्व की राजनीति पर इसके प्रभाव को लेकर अटकलें तेज हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम कूटनीतिक तनाव बढ़ा सकता है, लेकिन मानवाधिकार के मुद्दे पर EU के सख्त संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।
