🇮🇳 राष्ट्रीय सुरक्षा डेस्क (National Security Desk)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय तटरक्षक जहाज ICGS समुद्र प्रताप की कमीशनिंग को भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए एक अहम उपलब्धि बताया है। पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि यह जहाज न सिर्फ देश की सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करता है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत के विजन को भी नई ऊर्जा देता है।
🏗️ आत्मनिर्भर भारत डेस्क (Make in India Desk)
ICGS समुद्र प्रताप का निर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) ने किया है। यह भारत का पहला स्वदेशी प्रदूषण नियंत्रण तट रक्षक जहाज है, जिसमें 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है। इस जहाज को 5 जनवरी को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने औपचारिक रूप से कमीशन किया था।
🌊 पर्यावरण संरक्षण डेस्क (Environment Desk)
यह जहाज खास तौर पर समुद्री प्रदूषण से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें तेल रिसाव की पहचान, उसे नियंत्रित करने और समुद्र से हटाने के लिए अत्याधुनिक प्रणालियां मौजूद हैं। इससे भारत की समुद्री पर्यावरण सुरक्षा क्षमता को बड़ी मजबूती मिली है।
🔥 आपात प्रबंधन और सुरक्षा डेस्क (Emergency & Safety Desk)
ICGS समुद्र प्रताप में हाई-एंड फायर फाइटिंग सिस्टम (Fi-Fi Class-2) लगाया गया है, जो समुद्र में जहाजों या ऑफशोर प्लेटफॉर्म पर लगने वाली बड़ी आग से निपटने में सक्षम है। यह सुविधा समुद्री आपदाओं के दौरान शुरुआती और प्रभावी राहत सुनिश्चित करती है।
⚙️ तकनीक एवं हथियार डेस्क (Technology & Defence Desk)
जहाज में आधुनिक नेविगेशन और ऑटोमेशन सिस्टम लगाए गए हैं, जिनमें डायनेमिक पोजिशनिंग, इंटीग्रेटेड ब्रिज सिस्टम और पावर मैनेजमेंट सिस्टम शामिल हैं।
सुरक्षा के लिहाज से इसमें 30 मिमी की मुख्य गन और दो 12.7 मिमी की रिमोट-कंट्रोल्ड गन्स भी तैनात हैं।
📊 ICGS समुद्र प्रताप की प्रमुख विशेषताएं (Key Features Desk)
- लंबाई: 114.5 मीटर
- वजन: 4,200 टन
- अधिकतम गति: 22 नॉट
- रेंज: 6,000 नॉटिकल मील
- स्वदेशी सामग्री: 60% से अधिक
- क्रू क्षमता: 14 अधिकारी, 115 कर्मी
- बेस पोर्ट: कोच्चि
🚩 रणनीतिक महत्व डेस्क (Strategic Impact Desk)
ICGS समुद्र प्रताप के बेड़े में शामिल होने से भारतीय तटरक्षक बल की समुद्री कानून व्यवस्था, खोज-बचाव अभियान, प्रदूषण नियंत्रण और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी क्षमताएं और मजबूत होंगी। यह जहाज भारत की बढ़ती समुद्री आत्मनिर्भरता और तकनीकी क्षमता का प्रतीक माना जा रहा है।
