✍️ विदेश नीति डेस्क | नई दिल्ली
🇧🇩 बांग्लादेश मामला: अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल
भारतीय विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों पर हो रहे हमलों को लेकर गंभीर चिंता जताई है। साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय ने कहा कि वहां घर और कारोबार को निशाना बनाए जाने की घटनाएं एक चिंताजनक क्रम में सामने आ रही हैं।
मंत्रालय ने साफ किया कि इन हमलों को
- निजी विवाद
- या राजनीतिक टकराव
बताकर कमतर आंकना गलत और भ्रामक है। ऐसे तर्क दोषियों को संरक्षण देने जैसे हैं और इससे अल्पसंख्यकों में डर और असुरक्षा बढ़ती है।
⚖️ कानून व्यवस्था पर ज़ोर
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, सांप्रदायिक हिंसा से तेजी और सख्ती से निपटना जरूरी है। भारत का मानना है कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
⚡ अमेरिका का ऊर्जा बिल: भारत की स्पष्ट नीति
अमेरिका में प्रस्तावित उस बिल पर भी भारत ने प्रतिक्रिया दी, जो उसकी ऊर्जा रणनीति को प्रभावित कर सकता है। विदेश मंत्रालय ने दो टूक कहा कि
- भारत की ऊर्जा नीतियां 140 करोड़ नागरिकों की जरूरतों
- और बाजार की वास्तविक स्थितियों को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं।
भारत इस मसले पर हो रहे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर नज़र बनाए हुए है।
🚢 ताइवान के पास चीन की गतिविधियां: शांति की अपील
ताइवान के आसपास चीन के सैन्य अभ्यास पर भारत ने संयम और संवाद की वकालत की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि
- इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत के आर्थिक और समुद्री हित जुड़े हैं
- किसी भी तरह की एकतरफा कार्रवाई से क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित हो सकती है
इसलिए सभी पक्षों को बातचीत के ज़रिये समाधान निकालना चाहिए।
🔎 भारत का संदेश साफ
चाहे बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा हो,
अमेरिका की ऊर्जा नीति हो,
या इंडो-पैसिफिक में सैन्य गतिविधियां—
भारत ने हर मुद्दे पर संतुलित लेकिन सख्त रुख स्पष्ट कर दिया है।
