IND–RUS Oil Deal News:
रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर भारत की रणनीति में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका की ओर से रूसी तेल न खरीदने के लिए वैश्विक दबाव, भारत-अमेरिका ट्रेड डील और टैरिफ में कटौती जैसे घटनाक्रमों के बीच भारत ने रूस से तेल आयात में आंशिक कमी की है। हालांकि, इसके बावजूद रूस अब भी भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बना हुआ है।
रूस से तेल आयात में आई कमी
टैंकर ट्रैकिंग फर्म केपलर (Kpler) के आंकड़ों के मुताबिक:
- जनवरी 2026: रूस से आयात ~ 12.15 लाख बैरल प्रति दिन (bpd)
- दिसंबर 2025: ~ 12.5 लाख bpd
- जनवरी 2025: ~ 16.74 लाख bpd
यानी सालाना आधार पर रूस से तेल खरीद में स्पष्ट गिरावट देखने को मिली है। इसके बावजूद कुल आयात में रूस की हिस्सेदारी सबसे अधिक बनी हुई है।
IND-US ट्रेड डील का असर?
हाल ही में भारत-अमेरिका के बीच अहम ट्रेड डील हुई है, जिसके तहत अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाकर 18% कर दिया है। इसी के साथ अमेरिका लगातार अपने सहयोगी देशों पर रूसी तेल से दूरी बनाने का दबाव बना रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इसी भू-राजनीतिक दबाव और प्रतिबंधों की वजह से भारत ने अपने तेल आयात को डायवर्सिफाई करना शुरू किया है।
मध्य पूर्व और अफ्रीका से बढ़ी खरीद
जनवरी 2026 में भारत ने अन्य देशों से तेल आयात बढ़ाया:
- इराक:
- दिसंबर 2025: 9.04 लाख bpd
- जनवरी 2026: 10.35 लाख bpd
- सऊदी अरब:
- दिसंबर: 7.06 लाख bpd
- जनवरी: 7.94 लाख bpd
अफ्रीकी देशों से आयात में उछाल
- अंगोला: 72,000 → 2.54 लाख bpd
- नाइजीरिया: 1.42 लाख bpd
- कोलंबिया: 1.29 लाख bpd (नया प्रमुख सप्लायर)
अमेरिका और ब्राजील से आयात में हल्की गिरावट
- ब्राजील: 2.46 लाख → 2.21 लाख bpd
- अमेरिका: 3.29 लाख → 2.97 लाख bpd
क्या भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा?
विशेषज्ञों का साफ कहना है कि भारत रूस से तेल खरीद पूरी तरह बंद नहीं करेगा।
कारण साफ हैं:
- रूसी तेल अब भी डिस्काउंट पर उपलब्ध है
- भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए यह अहम है
- रिफाइनरियां कीमत, क्वालिटी और लॉजिस्टिक्स के हिसाब से संतुलन बना रही हैं
हालांकि, मौजूदा हालात बने रहे तो रूस को अपने तेल पर और ज्यादा छूट देनी पड़ सकती है।
बदलती रणनीति का संकेत
एनालिस्ट्स के मुताबिक, ताजा आंकड़े यह दिखाते हैं कि भारतीय रिफाइनरियां अब एक ही देश पर निर्भर रहने के बजाय:
- मध्य पूर्व
- अफ्रीका
- अमेरिका और लैटिन अमेरिका
जैसे क्षेत्रों से विकल्प खुले रख रही हैं। यह रणनीति कीमतों की अस्थिरता, सप्लाई रिस्क और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से निपटने के लिए अपनाई जा रही है।
निष्कर्ष
भारत रूस से तेल खरीद कम जरूर कर रहा है, लेकिन उसे पूरी तरह छोड़ने का कोई संकेत फिलहाल नहीं है। IND-US ट्रेड डील और वैश्विक दबाव के बावजूद भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए संतुलित और व्यावहारिक नीति अपना रहा है।
