क्या इजरायल बनने वाला है भारत का रूस जैसा दूसरा भरोसेमंद साथी? नेतन्याहू कैसे हुए PM मोदी के फैन?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार से दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर इजरायल जा रहे हैं। यह यात्रा केवल औपचारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि इस दौरान रक्षा, अत्याधुनिक तकनीक और सुरक्षा सहयोग से जुड़े कई बड़े समझौते हो सकते हैं। यही वजह है कि इजरायल को अब भारत के लिए रूस जैसे दूसरे भरोसेमंद साझेदार के तौर पर देखा जाने लगा है।


PM मोदी और नेतन्याहू की “स्ट्रैटेजिक दोस्ती”

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पीएम मोदी—दोनों ही कट्टर राष्ट्रवादी माने जाते हैं। आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख, आधुनिक टेक्नोलॉजी पर भरोसा और अपनी-अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व—इन समानताओं ने दोनों नेताओं को करीब ला दिया है। नेतन्याहू खुद कई बार कह चुके हैं कि पीएम मोदी उनके “व्यक्तिगत दोस्त” हैं और दोनों नेताओं के बीच नियमित संवाद रहता है।

पीएम मोदी अपने करीब 12 वर्षों के कार्यकाल में दूसरी बार इजरायल जा रहे हैं। इससे पहले 2017 की यात्रा ने दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दी थी। अब लगभग नौ साल बाद यह दौरा भारत–इजरायल संबंधों में एक और बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।


क्या इजरायल बन सकता है भारत का रूस जैसा पक्का साथी?

भारत के लिए रूस दशकों से सबसे बड़ा रक्षा साझेदार रहा है—चाहे SU-30 फाइटर जेट हों, T-90 टैंक, S-400 एयर डिफेंस सिस्टम या ब्रह्मोस मिसाइल का संयुक्त विकास। लेकिन बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच भारत ने अपने रक्षा साझेदारों का दायरा बढ़ाया है, और इसमें इजरायल तेजी से उभरा है।

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट के मुताबिक 2020–24 के बीच रूस के बाद इजरायल भारत का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता बन गया है। भारत, इजरायल के कुल रक्षा निर्यात का लगभग 34% हिस्सा खरीदता है।


हथियार और टेक्नोलॉजी में इजरायल की ताकत

इजरायल सिर्फ हथियारों की मात्रा नहीं, बल्कि उनकी क्वालिटी और टेक्नोलॉजी के लिए जाना जाता है।

  • स्पाइक मिसाइल
  • हेरॉन ड्रोन
  • बराक-8 एयर डिफेंस सिस्टम
  • आइरन डोम और लेजर आधारित आइरन बीम

इनमें से कई तकनीकें ऐसी हैं, जो रूस के पास भी सीमित रूप में ही उपलब्ध हैं। माना जाता है कि 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवाद-रोधी अभियानों में इजरायली सिस्टम्स ने सटीक प्रदर्शन किया।


2026 की मेगा डील और ‘हेक्सागन एलायंस’

2026 के लिए भारत–इजरायल के बीच करीब 8.6 अरब डॉलर की रक्षा डील की चर्चा है। इसमें एयर डिफेंस, लेजर बेस्ड सिस्टम और एडवांस्ड मिसाइलें शामिल हो सकती हैं। पीएम मोदी के इस दौरे में संवेदनशील टेक्नोलॉजी शेयरिंग और संयुक्त उत्पादन से जुड़ा नया MoU साइन होने की उम्मीद है।

नेतन्याहू भारत को तथाकथित “हेक्सागन एलायंस” में शामिल करना चाहते हैं—जिसमें भारत, इजरायल के साथ कुछ अरब देश, अफ्रीकी साझेदार, ग्रीस और साइप्रस शामिल हो सकते हैं। इसका मकसद कट्टरपंथी ताकतों और चीन–पाकिस्तान धुरी का रणनीतिक जवाब तैयार करना बताया जा रहा है।


भारत की आत्मनिर्भर रक्षा और इजरायली सहयोग

भारत अपना स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम ‘सुदर्शन चक्र’ विकसित कर रहा है, जिसमें इजरायली तकनीक की अहम भूमिका मानी जा रही है। इजरायल की खासियत है—तेज डिलीवरी, “नो स्ट्रिंग्स अटैच्ड” नीति और संयुक्त विकास पर जोर। यही कारण है कि भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ रक्षा नीति में इजरायल एक महत्वपूर्ण भागीदार बनता जा रहा है।


पीएम मोदी के दौरे का कार्यक्रम

इस दौरे में पीएम मोदी

  • इजरायली संसद नैसेट को संबोधित करेंगे (यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री का पहला ऐसा संबोधन होगा),
  • यद वासेम होलोकॉस्ट स्मारक जाएंगे,
  • और इनोवेशन व टेक्नोलॉजी इवेंट्स में हिस्सा लेंगे।

वार्ताओं में कृषि, जल प्रबंधन, AI, स्वच्छ ऊर्जा और संभावित FTA जैसे मुद्दे भी प्रमुख रहेंगे।


निष्कर्ष

1992 में औपचारिक राजनयिक संबंध शुरू होने के बाद से, खासकर 2014 के बाद, भारत–इजरायल रिश्ते अभूतपूर्व रूप से मजबूत हुए हैं। अब सवाल यह नहीं कि इजरायल भारत का रणनीतिक साझेदार है या नहीं—बल्कि यह है कि क्या वह रूस की तरह भारत का दीर्घकालिक, भरोसेमंद और अपरिहार्य साथी बन सकता है। पीएम मोदी का यह दौरा उसी दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

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