सोमवार, 2 मार्च 2026 को भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों के लिए माहौल बेहद निराशाजनक रहा। मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध जैसे हालात और उससे जुड़े भू-राजनीतिक जोखिमों का सीधा असर घरेलू बाजार पर देखने को मिला। कारोबारी हफ्ते के पहले ही दिन बीएसई सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों में जोरदार बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों का बड़ा नुकसान हुआ।
कारोबार के अंत में सेंसेक्स 1048.34 अंकों यानी करीब 1.29 फीसदी की गिरावट के साथ 80,238.85 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 इंडेक्स 312.95 अंक या 1.24 फीसदी टूटकर 24,865.70 पर आ गया। बाजार की यह गिरावट साफ तौर पर इस बात का संकेत थी कि वैश्विक तनाव के बीच निवेशक जोखिम लेने से बच रहे हैं।
मिडिल-ईस्ट युद्ध का सीधा असर बाजार पर
सोमवार को बाजार पर सबसे बड़ा दबाव मिडिल-ईस्ट में बढ़ते संघर्ष के कारण देखने को मिला। इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई की खबरों ने वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी Saudi Aramco की रास तनूरा रिफाइनरी पर कथित ड्रोन हमला किया। कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर बढ़ी अनिश्चितता ने पूरी दुनिया के शेयर बाजारों को हिला दिया, और भारत भी इससे अछूता नहीं रहा।
सेंसेक्स की 30 में से 27 कंपनियां लाल निशान में
अगर सेंसेक्स की कंपनियों की बात करें, तो हालात और भी ज्यादा चिंताजनक नजर आए। सेंसेक्स की 30 में से सिर्फ 3 कंपनियों के शेयर ही हरे निशान में बंद हो सके, जबकि बाकी की 27 कंपनियों में गिरावट दर्ज की गई। यानी लगभग पूरा सेंसेक्स बिकवाली के दबाव में रहा।
निफ्टी 50 की स्थिति भी कुछ ऐसी ही रही। निफ्टी की 50 में से केवल 8 कंपनियां ही बढ़त के साथ बंद हुईं, जबकि 42 शेयरों में गिरावट देखने को मिली।
किन शेयरों ने दी राहत, किन्होंने बढ़ाया नुकसान
सोमवार के कारोबार में कुछ गिने-चुने शेयरों ने ही निवेशकों को थोड़ी राहत दी। सेंसेक्स में शामिल बीईएल के शेयर सबसे ज्यादा 2.20 फीसदी की तेजी के साथ बंद हुए। इसके अलावा सन फार्मा और आईटीसी जैसे शेयरों ने भी मामूली बढ़त दिखाई।
वहीं दूसरी ओर, कई दिग्गज शेयरों में तेज गिरावट ने बाजार की हालत और बिगाड़ दी। एलएंडटी, अडाणी पोर्ट्स, मारुति सुजुकी, एशियन पेंट्स, बजाज फिनसर्व, रिलायंस इंडस्ट्रीज और बैंकिंग व आईटी सेक्टर के कई बड़े नाम लाल निशान में बंद हुए। इंडिगो के शेयरों में सबसे ज्यादा करीब 5.87 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई, जिसने निवेशकों को बड़ा झटका दिया।
आगे बाजार की चाल पर क्या रहेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मिडिल-ईस्ट में हालात सामान्य नहीं होते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक संकेत और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगी। ऐसे माहौल में निवेशकों को सतर्क रहने, अफवाहों से बचने और लंबी अवधि की रणनीति के साथ निवेश करने की सलाह दी जा रही है।
कुल मिलाकर, सोमवार का दिन शेयर बाजार के लिए भारी नुकसान वाला साबित हुआ, और निवेशकों की नजर अब वैश्विक घटनाक्रमों पर टिकी हुई है।
