Noida हादसा: कोहरे में छुपा गड्ढा बना मौत का जाल, 72 घंटे बाद बाहर निकली इंजीनियर की कार

नोएडा के सेक्टर-150 में हुई एक दर्दनाक घटना ने प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक निर्माणाधीन अपार्टमेंट के पास खुले और पानी से भरे गड्ढे में कार गिरने से 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर की जान चली गई। हादसे के तीन दिन बाद अब जाकर कार को बाहर निकाला जा सका है।


🏗️ निर्माण स्थल की अनदेखी बनी हादसे की वजह

यह घटना 17 जनवरी की रात की है, जब गुरुग्राम से लौट रहे इंजीनियर युवराज मेहता सेक्टर-150 मोड़ पर यू-टर्न लेते समय घने कोहरे के कारण सड़क के किनारे मौजूद खुला गड्ढा नहीं देख सके। बिना किसी बैरिकेडिंग या चेतावनी संकेत के यह गड्ढा पानी से भरा हुआ था, जिसमें उनकी कार फिसलकर जा गिरी।


📞 मदद की गुहार, लेकिन समय पर रेस्क्यू नहीं

हादसे के बाद युवराज ने तुरंत अपने पिता को फोन कर स्थिति की जानकारी दी और आपातकालीन नंबर पर भी कॉल की गई। पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन राहत कार्यों में देरी हुई। फायर ब्रिगेड और SDRF को बुलाया गया, हालांकि रेस्क्यू ऑपरेशन समय पर प्रभावी रूप से शुरू नहीं हो सका।


72 घंटे बाद निकली कार, पहले मिल चुका था शव

लगभग तीन दिन बाद गड्ढे से युवराज की कार को बाहर निकाला गया। इससे पहले उनका शव बरामद किया जा चुका था। इस देरी ने स्थानीय प्रशासन और रेस्क्यू एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


⚖️ कार्रवाई शुरू, बिल्डर गिरफ्तार

मामले में पुलिस ने एमजे विशटाउन और लोटस ग्रीन नाम की बिल्डर कंपनियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। नामजद आरोपी बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया है। साथ ही, शासन स्तर पर संज्ञान लेते हुए नोएडा प्राधिकरण के CEO को पद से हटा दिया गया है।


🏛️ प्रशासनिक जिम्मेदारी पर उठे सवाल

यह हादसा एक बार फिर शहरी विकास परियोजनाओं में सुरक्षा मानकों की अनदेखी को उजागर करता है। खुले गड्ढे, पर्याप्त लाइटिंग और चेतावनी संकेतों की कमी ने एक युवा की जान ले ली।


📌 निष्कर्ष

नोएडा की यह घटना केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम की चूक का उदाहरण है। अब देखना होगा कि जांच के बाद दोषियों पर कितनी सख्त कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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