SC के आदेशों के बीच यूपी में बुलडोज़र एक्शन पर फिर सवाल, इलाहाबाद हाई कोर्ट की सख़्त टिप्पणी


🏛️ न्यायपालिका (Judiciary)

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में जारी बुलडोज़र कार्रवाई को लेकर कड़ी नाराज़गी जताई है। कोर्ट का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दंड के रूप में की जाने वाली तोड़फोड़ पर रोक लगाने के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद, ज़मीनी स्तर पर इनका पालन नहीं हो रहा। अदालत ने इसे न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप जैसा बताया।


⚖️ संवैधानिक व्यवस्था (Constitutional Principles)

हाई कोर्ट ने दोहराया कि किसी भी आरोपी को सज़ा देने का अधिकार केवल अदालतों के पास है। प्रशासनिक स्तर पर किसी इमारत को “सज़ा” के रूप में गिराना शक्तियों के विभाजन (Separation of Powers) के सिद्धांत के खिलाफ है, जिसे सुप्रीम कोर्ट पहले ही असंवैधानिक ठहरा चुका है।


🏢 प्रशासनिक कार्रवाई (Administrative Actions)

कोर्ट ने चिंता जताई कि कई मामलों में किसी अपराध के सामने आते ही संबंधित व्यक्ति या उसके परिजनों को अतिक्रमण का नोटिस दे दिया जाता है। इसके बाद कानूनी औपचारिकताओं का दिखावा करते हुए तेज़ी से तोड़फोड़ कर दी जाती है, जिससे निष्पक्ष प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं।


👨‍👩‍👦 नागरिक अधिकार (Civil Rights)

हमीरपुर से जुड़े इस मामले में याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि वे किसी FIR में आरोपी नहीं हैं, फिर भी उनकी निजी संपत्तियों—घर, लॉज और आरा मशीन—पर कार्रवाई की आशंका है। याचिका में कहा गया कि अपराध के आरोप किसी रिश्तेदार पर हैं, लेकिन कार्रवाई पूरे परिवार पर हो रही है।


🚔 कानून-व्यवस्था (Law & Order)

परिवार का आरोप है कि संबंधित आपराधिक मामले के बाद पुलिस की मौजूदगी में एक भीड़ ने उनके घर को निशाना बनाया। इसके तुरंत बाद प्रशासन की ओर से नोटिस जारी किए गए, जिससे निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए।


👩‍⚖️ कोर्ट की टिप्पणी (Court Observations)

जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि अदालत ऐसे कई मामलों की गवाह रही है, जहां नियमों की आड़ में दंडात्मक तोड़फोड़ की गई। कोर्ट ने संकेत दिए कि ऐसे मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप ज़रूरी हो सकता है।


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