आउटसाइडर एक्टर्स जो इंडस्ट्री में आए तो थे बड़े सपनों के साथ… लेकिन एक्टिंग में ग्रोथ क्यों नहीं दिख रही?

फिल्म इंडस्ट्री में “आउटसाइडर” होना अपने आप में एक बहुत बड़ी चुनौती होती है। जिन कलाकारों का फिल्मी बैकग्राउंड नहीं होता, उनके लिए यहां तक पहुंचना ही अपने आप में एक लंबी और कठिन यात्रा होती है। ऑडिशन, रिजेक्शन, स्ट्रगल और सालों की मेहनत के बाद उन्हें वह मौका मिलता है जिसका सपना लाखों लोग देखते हैं।

इसी वजह से जब कोई आउटसाइडर अभिनेता या अभिनेत्री इंडस्ट्री में जगह बनाता है, तो ऑडियंस अक्सर उनके साथ एक खास तरह की सहानुभूति और सपोर्ट महसूस करती है। लोग चाहते हैं कि वे सफल हों, अच्छा काम करें और इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाएं।

लेकिन असली सवाल तब खड़ा होता है जब सालों तक इंडस्ट्री में काम करने के बाद भी कुछ कलाकार अपनी एक्टिंग में वह ग्रोथ नहीं दिखा पाते जिसकी उनसे उम्मीद की जाती है। शुरुआत में उन्हें जो मौके मिलते हैं, वे उन्हें पहचान दिलाते हैं, लेकिन समय के साथ अगर उनके परफॉर्मेंस में सुधार नजर नहीं आता, तो धीरे-धीरे ऑडियंस का भरोसा भी कम होने लगता है।

यहां बात नेपोटिज्म या बैकग्राउंड की नहीं है। बल्कि बात उस ग्रोथ की है जो किसी भी कलाकार के करियर में समय के साथ दिखाई देनी चाहिए। अगर कोई अभिनेता कई सालों तक फिल्मों में काम करता है, बड़े बजट के प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनता है, लेकिन फिर भी उसकी एक्टिंग में वही पुराना पैटर्न दिखाई देता है, तो सवाल उठना स्वाभाविक है।

इस आर्टिकल में हम कुछ ऐसे आउटसाइडर एक्टर्स के बारे में बात करेंगे जिन्होंने इंडस्ट्री में अपनी फेस वैल्यू और पॉपुलैरिटी तो बना ली है, लेकिन एक्टिंग के मामले में अभी भी उनसे कहीं ज्यादा उम्मीद की जाती है।


10. रकुल प्रीत सिंह

रकुल प्रीत सिंह पिछले लगभग 17 सालों से फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा हैं। उन्होंने साउथ इंडियन सिनेमा में काफी काम किया है और वहां उनकी अच्छी पहचान भी बनी। हिंदी फिल्मों में उन्हें खास तौर पर “दे दे प्यार दे” जैसी फिल्मों से पॉपुलैरिटी मिली।

हालांकि उनकी स्क्रीन प्रेजेंस और लुक्स को अक्सर सराहा जाता है, लेकिन एक्टिंग के मामले में उन्हें अक्सर औसत माना गया है। कई बार ऐसा लगता है कि वे भावनात्मक या गंभीर दृश्यों को पूरी तरह से प्रभावशाली तरीके से निभा नहीं पातीं।

कुछ फिल्मों में उनके कॉन्फ्रंटेशन सीन ऐसे लगे जैसे वे ज्यादा परफॉर्म कर रही हों, जिससे सीन की रियलिस्टिक फीलिंग कम हो जाती है। यही कारण है कि इतने लंबे करियर के बावजूद उनके पास ऐसा कोई मजबूत किरदार नहीं है जिसे उनकी एक्टिंग के लिए याद रखा जाए।


9. जैकलिन फर्नांडिस

जैकलिन फर्नांडिस का करियर 2011 से 2016 के बीच अपने पीक पर था। “मर्डर 2”, “किक” और “हाउसफुल” जैसी कमर्शियल फिल्मों ने उन्हें इंडस्ट्री में एक मजबूत पहचान दी।

उनकी डांसिंग स्किल्स, ग्लैमर और स्क्रीन प्रेजेंस की वजह से वे लंबे समय तक बॉलीवुड की लोकप्रिय अभिनेत्रियों में शामिल रहीं। लेकिन जब बात एक्टिंग की आती है, तो उन्हें हमेशा एक कमजोर परफॉर्मर माना गया है।

इतने सालों के करियर के बाद भी उनकी एक्टिंग में कोई बड़ा बदलाव या सुधार दिखाई नहीं देता। शायद यही वजह है कि उन्हें अक्सर ग्लैमरस रोल्स या खास गानों तक ही सीमित कर दिया जाता है।


8. सिद्धार्थ मल्होत्रा

सिद्धार्थ मल्होत्रा ने अपने करियर की शुरुआत “स्टूडेंट ऑफ द ईयर” से की थी। हालांकि वह फिल्म करण जौहर के प्रोडक्शन की थी, लेकिन सिद्धार्थ का फिल्मी बैकग्राउंड नहीं था और उन्होंने इंडस्ट्री में अपनी जगह खुद बनाई।

उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट “शेरशाह” रही। इस फिल्म में उनके अभिनय की काफी तारीफ हुई और ऐसा लगा कि अब उनका करियर एक नए स्तर पर पहुंच जाएगा।

लेकिन इसके बाद भी उनकी फिल्मों का चुनाव और अभिनय का स्टाइल काफी हद तक वही पुराना लगता है। उनके किरदारों में वह गहराई और ट्रांसफॉर्मेशन कम ही दिखाई देता है जिसकी उनसे उम्मीद की जाती है।


7. पूजा हेगड़े

पूजा हेगड़े ने साउथ फिल्म इंडस्ट्री में बड़ी सफलता हासिल करने के बाद बॉलीवुड में कदम रखा। उन्हें “मोहनजोदड़ो”, “हाउसफुल 4” और “किसी का भाई किसी की जान” जैसी बड़ी फिल्मों में काम करने का मौका मिला।

हालांकि वे एक शिक्षित परिवार से आती हैं और इंडस्ट्री तक पहुंचने की उनकी अपनी अलग यात्रा रही है, लेकिन एक्टिंग के मामले में अभी तक उन्होंने ऐसा कोई प्रदर्शन नहीं दिया जिसे यादगार कहा जा सके।

अक्सर उन्हें फिल्मों में हीरो के लव इंटरेस्ट के रूप में ही दिखाया जाता है, जहां उनके किरदार में ज्यादा गहराई या कहानी का मजबूत हिस्सा नहीं होता।


6. तारा सुतारिया

तारा सुतारिया की पर्सनालिटी काफी मजबूत और आत्मविश्वासी मानी जाती है। इंटरव्यू में वे अपने विचार खुलकर रखती हैं और उनकी स्क्रीन प्रेजेंस भी अच्छी है।

लेकिन उनकी फिल्मोग्राफी में अब तक ऐसा बहुत कम देखने को मिला है जहां उन्होंने अपने अभिनय से खास प्रभाव छोड़ा हो।

ज्यादातर फिल्मों में उन्हें हीरो की लव इंटरेस्ट या “फ्लावर पॉट” किरदार में ही कास्ट किया गया है। अगर उन्हें भविष्य में मजबूत और अलग तरह के रोल मिलते हैं, तो शायद वे अपनी एक्टिंग का नया पक्ष दिखा सकें।


5. दिशा पाटनी

दिशा पाटनी बॉलीवुड की सबसे फिट और ग्लैमरस अभिनेत्रियों में से एक मानी जाती हैं। उनकी सोशल मीडिया पॉपुलैरिटी भी काफी ज्यादा है।

लेकिन अगर उनकी फिल्मों की बात करें, तो ऐसी बहुत कम फिल्में हैं जिनमें उनकी एक्टिंग को लेकर चर्चा हुई हो। कई बार ऐसा लगता है कि वे एक ही तरह के किरदारों में फंसकर रह गई हैं।

बड़े बजट की फिल्मों और साउथ प्रोजेक्ट्स में काम करने के बावजूद उनके अभिनय में ज्यादा बदलाव देखने को नहीं मिलता।


4. भूमि पेडनेकर

भूमि पेडनेकर ने “दम लगा के हईशा” से अपने करियर की शुरुआत की और इस फिल्म में उनके अभिनय की काफी तारीफ हुई। इसके बाद “टॉयलेट: एक प्रेम कथा” और “बधाई दो” जैसी फिल्मों में भी उन्होंने अच्छे किरदार निभाए।

लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उनकी फिल्मों और अभिनय को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया मिली है। कुछ प्रोजेक्ट्स में उनका अभिनय जरूरत से ज्यादा ओवर-परफॉर्मेटिव लगता है।

ऑडियंस को उनसे जिस स्तर की परफॉर्मेंस की उम्मीद थी, वह लगातार नहीं दिख पाई है।


3. कार्तिक आर्यन

कार्तिक आर्यन की जर्नी एक क्लासिक आउटसाइडर स्टोरी मानी जाती है। बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के उन्होंने इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाई।

“प्यार का पंचनामा” से शुरू हुआ उनका सफर “सोनू के टीटू की स्वीटी” और “भूल भुलैया 2” जैसी फिल्मों तक पहुंचा, जहां उन्होंने बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल की।

लेकिन हाल के समय में उनकी कॉमिक टाइमिंग और अभिनय थोड़ा रिपिटेटिव लगने लगा है। अगर वे अपने किरदारों में विविधता नहीं लाते, तो भविष्य में ऑडियंस उनसे ज्यादा उम्मीद नहीं रखेगी।


2. कंगना रनौत

कंगना रनौत बॉलीवुड की सबसे टैलेंटेड अभिनेत्रियों में से एक मानी जाती हैं। उन्होंने “क्वीन” और “तनु वेड्स मनु” जैसी फिल्मों से इंडस्ट्री में एक नया ट्रेंड सेट किया।

यहां तक कि उनकी कुछ फ्लॉप फिल्मों में भी उनके अभिनय की तारीफ हुई। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में ऐसा महसूस होता है कि उनका फोकस फिल्मों से ज्यादा राजनीति से जुड़े विषयों पर चला गया है।

किसी कलाकार का राजनीतिक होना गलत नहीं है, लेकिन जब यह उनकी क्रिएटिव चॉइस और अभिनय के विकास को प्रभावित करने लगे, तब यह चर्चा का विषय बन जाता है।


1. तमन्ना भाटिया

तमन्ना भाटिया पिछले लगभग दो दशकों से फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा हैं। उनकी लोकप्रियता खास तौर पर उनके गानों और स्क्रीन प्रेजेंस की वजह से रही है।

कई बार ऐसा हुआ है कि किसी फिल्म में उनका एक गाना ही उसे बड़े स्तर पर पॉपुलर बना देता है।

लेकिन जब उनकी एक्टिंग की बात आती है, तो अक्सर यह कहा जाता है कि उनकी परफॉर्मेंस उतनी प्रभावशाली नहीं होती जितनी उनकी लोकप्रियता है।

इतने लंबे करियर के बाद भी उनके अभिनय में वह विकास दिखाई नहीं देता जिसकी उनसे उम्मीद की जाती है।


निष्कर्ष

फिल्म इंडस्ट्री में सफल होना सिर्फ एक या दो हिट फिल्मों से तय नहीं होता। असली सफलता तब मानी जाती है जब कोई कलाकार समय के साथ अपने अभिनय में लगातार सुधार करता रहे और अलग-अलग तरह के किरदार निभाने का साहस दिखाए।

आउटसाइडर होने की कहानी शुरुआत में प्रेरणादायक जरूर होती है, लेकिन लंबे समय तक उसी पर टिके रहना संभव नहीं है। अंततः ऑडियंस सिर्फ अच्छी फिल्मों और मजबूत अभिनय को ही याद रखती है।

अगर ये कलाकार अपने किरदारों के चुनाव में विविधता लाएं और अपनी एक्टिंग स्किल्स पर लगातार काम करें, तो निश्चित ही वे अपने करियर को एक नए स्तर पर ले जा सकते हैं।

अब सवाल यह है कि आपके अनुसार ऐसा कौन-सा अभिनेता है जिसे अपनी एक्टिंग में और ज्यादा सुधार करना चाहिए? और ऐसा कौन-सा कलाकार है जिस पर आपने उम्मीद छोड़ दी है कि अब वह शायद ज्यादा बेहतर नहीं हो पाएगा?

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