HMT: वह कंपनी जिसने पूरे भारत को घड़ी पहनना सिखाया

HMT… एक ऐसा नाम जिसने कभी पूरे भारत को घड़ी पहनना सिखाया था।
एक समय ऐसा था कि भारत के हर दूसरे घर में HMT की घड़ी जरूर मिल जाती थी।

शादी-ब्याह में दूल्हे को HMT की घड़ी गिफ्ट करना तो जैसे एक परंपरा बन चुका था।
कहा जाता है कि उस दौर में भारत में बिकने वाली 100 घड़ियों में से लगभग 90 घड़ियां HMT की होती थीं।

लेकिन सवाल यह है कि जिसने पूरे देश को समय दिखाया…
वही कंपनी समय के साथ क्यों नहीं चल पाई?

क्या हुआ HMT का?
और क्या यह कंपनी आज भी मौजूद है?

आइए पूरी कहानी जानते हैं।


शुरुआत: नेहरू का आत्मनिर्भर भारत का सपना

भारत को आजादी मिले ज्यादा समय नहीं हुआ था। उस समय देश के प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru का सपना था कि भारत हर क्षेत्र में आत्मनिर्भर बने।

यानी मशीनों और इंडस्ट्रियल टूल्स के लिए भारत को विदेशी कंपनियों पर निर्भर न रहना पड़े।

इसी सोच के साथ 1953 में एक सरकारी कंपनी की स्थापना हुई —
Hindustan Machine Tools

शुरुआत में HMT का काम था मशीन टूल्स बनाना, जो फैक्ट्रियों और उद्योगों में इस्तेमाल होते थे।

लेकिन कुछ साल बाद नेहरू ने HMT को एक नई जिम्मेदारी दी —
भारत में घड़ी बनाना।


भारत की पहली घड़ी बनाने वाली कंपनी

उस समय भारत में घड़ियां मिलती तो थीं, लेकिन वे ज्यादातर इंपोर्टेड होती थीं और इतनी महंगी होती थीं कि आम आदमी उन्हें खरीद ही नहीं सकता था।

ऐसे में HMT ने 1961 में जापान की कंपनी
Citizen Watch Co.
के साथ मिलकर बेंगलुरु में घड़ी बनाना शुरू किया।

और 1963 में लॉन्च हुई HMT की पहली घड़ी — जनता


“जनता” – भारत की सबसे पॉपुलर घड़ी

उस समय दुनिया की बड़ी वॉच कंपनियां अमीर लोगों के लिए घड़ियां बना रही थीं। लेकिन HMT ने फैसला किया कि घड़ी आम जनता तक पहुंचनी चाहिए।

इसलिए उन्होंने अपनी घड़ी का नाम ही रखा — जनता

यह घड़ी इतनी पॉपुलर हुई कि HMT ने इसके लगभग 15 करोड़ पीस बेच दिए।

इसके पीछे तीन बड़ी वजहें थीं:

  1. सिंपल और एलीगेंट डिजाइन
  2. सस्ता दाम – 1972 में इसकी कीमत सिर्फ ₹112 थी
  3. सेलिब्रिटी इफेक्ट

क्योंकि उस समय प्रधानमंत्री Indira Gandhi को भी यह घड़ी पहनते देखा गया था।


HMT के पॉपुलर मॉडल

जनता के बाद HMT ने कई मॉडल लॉन्च किए जैसे:

  • पायलट
  • कोहिनूर
  • कंचन
  • जवान
  • चिराग

इनमें से कंचन घड़ी शादी में गिफ्ट देने के लिए इतनी पॉपुलर हुई कि इसे डाउरी वॉच भी कहा जाने लगा।


घड़ियों के अलावा ट्रैक्टर बिजनेस

HMT सिर्फ घड़ियों तक सीमित नहीं रही।

1971 में कंपनी ने चेकोस्लोवाकिया की कंपनी
Motokov
के साथ मिलकर ट्रैक्टर बनाना भी शुरू कर दिया।

HMT के ट्रैक्टर भी किसानों के बीच काफी पॉपुलर हो गए।


क्वार्ट्ज रिवोल्यूशन – टर्निंग पॉइंट

1980 के दशक में पूरी दुनिया में क्वार्ट्ज वॉचेस का दौर शुरू हो गया।

क्वार्ट्ज घड़ियां बैटरी से चलती थीं और मैकेनिकल घड़ियों से ज्यादा सटीक होती थीं।

HMT ने भी 1981 में क्वार्ट्ज घड़ियां लॉन्च कीं —
सोना और विजय

लेकिन ये घड़ियां फ्लॉप हो गईं।

क्यों?

  • महंगी थीं
  • मार्केटिंग कमजोर थी
  • लोग मैकेनिकल घड़ियों के आदी थे

असली खतरा: Titan की एंट्री

1984 में घड़ी बाजार में एंट्री हुई
Titan Company की।

यह कंपनी Tata Group और Tamil Nadu Industrial Development Corporation की जॉइंट वेंचर थी।

Titan ने शुरुआत से ही क्वार्ट्ज घड़ियों पर फोकस किया।

1987 में जब Titan ने अपनी घड़ियां लॉन्च कीं तो उनके:

  • डिजाइन मॉडर्न थे
  • मार्केटिंग जबरदस्त थी
  • घड़ियां फैशन एक्सेसरी की तरह प्रमोट की गईं

और धीरे-धीरे Titan ने HMT का मार्केट शेयर खाना शुरू कर दिया।


बड़ा झटका

1986 में HMT के 350 इंजीनियर कंपनी छोड़कर Titan में चले गए।

यही लोग HMT की टेक्निकल बैकबोन थे।

इनके जाने के बाद HMT की टेक्नोलॉजी और डिजाइन दोनों कमजोर हो गए।


1991 का लिबरलाइजेशन

1991 में भारत में आर्थिक उदारीकरण हुआ।

इसके बाद कई विदेशी ब्रांड भारत में आ गए जैसे:

  • Casio
  • Timex
  • Swatch
  • Tommy Hilfiger

अब ग्राहकों के पास बहुत सारे विकल्प थे।

लेकिन HMT अभी भी पुराने मैकेनिकल डिजाइन में फंसी हुई थी।


गिरावट की शुरुआत

1994 में पहली बार HMT को घाटा हुआ।

इसके बाद कंपनी लगातार नुकसान में जाने लगी।

  • 2000-01 में नुकसान: ₹60 करोड़
  • 2012-13 में नुकसान: ₹242 करोड़

सरकार ने कई बार कंपनी को बचाने की कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली।


आखिरकार 2016 में बंद

मई 2016 में सरकार ने HMT के वॉच और ट्रैक्टर बिजनेस को बंद करने का फैसला कर लिया।

देशभर की लगभग सभी फैक्ट्रियां बंद हो गईं।


क्या HMT आज भी जिंदा है?

पूरी तरह नहीं… लेकिन खत्म भी नहीं हुई।

आज भी बेंगलुरु में HMT भवन नाम से एक स्टोर मौजूद है।

वहीं HMT Heritage Centre & Museum में इस कंपनी का इतिहास देखा जा सकता है।

2019 में HMT की वेबसाइट भी दोबारा लॉन्च हुई।

लेकिन अब कंपनी का मुख्य फोकस है:

  • मशीन टूल्स
  • इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट
  • डिफेंस सेक्टर

निष्कर्ष

HMT की कहानी हमें एक बहुत बड़ा बिजनेस लेसन देती है:

अगर कोई कंपनी समय के साथ खुद को नहीं बदलती,
तो समय उसे पीछे छोड़ देता है।

जिस कंपनी ने कभी पूरे देश को समय देखना सिखाया था…
वही कंपनी समय के साथ चलना भूल गई।

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